कांग्रेस सरकार के लिए गड्ढा खोद रही भाजपा, अपने ही गड्ढे में औंधे मुंह गिरी : ओझा


शिवराज और गोपाल में, प्रदेश भाजपा के नेतृत्व और श्रेय लेने की होड़ के कारण रसातल में भाजपा          


भोपाल । मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने कल ''दंड विधि संशोधन विधेयक'' पर हुए मतदान में, कांग्रेस को मिले 122 विधायकों के समर्थन के बाद, भाजपा नेताओं द्वारा की जारी बयानबाजी को उनकी हताशा और अवसाद का प्रतीक बताते हुए कहा कि, कल के घटनाक्रम के बाद ''बिल्ली के भाग्य से, छींका टूटने का इंतजार करने वाली'', भाजपा को यह साफ हो गया है, कि कांग्रेस पार्टी की प्रदेश सरकार, कमलनाथ के नेतृत्व में पूरी  मजबूती से अपना काम कर रही है और उसका एक-एक विधायक, बिना किसी प्रलोभन या भय के, प्रदेश की उन्नति और विकास का नया अध्याय लिखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ओझा ने कहा कि भाजपा के नेता भ्रम फैलाकर, सरकार की अस्थिरता के नाम पर जनता को गुमराह करते रहे हैं, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव व "दंड विधि संशोधन विधेयक" पर मत विभाजन में, भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है और उसका लोकतंत्र विरोधी चेहरा उभरकर सामने आ गया है। ओझा ने कहा कि भाजपा के नेता प्रतिपक्ष ने सरकार गिराने और कांग्रेस के पिंडदान करने संबंधी बयान देकर भाजपा की संकुचित और निम्नस्तरीय सोच को ही एक बार फिर दर्शाया है। ओझा ने कहा कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को अपने डेढ़ दशक लंबे कार्यकाल में, कभी किसानों की याद नहीं आई, 21 हजार किसानों की आत्महत्या और 6 किसानों के नरसंहार के बावजूद, उनका जमीर कभी नहीं जागा, किन्तु आज जब कमलनाथ सरकार ने ''जय किसान ऋण माफी योजना'' के तहत प्रदेश के लाखों किसानों की कर्जमाफी कर, उनके जीवन में खुशहाली का पैगाम दिया है, तो उस पर शिवराज सिंह चैहान आज सस्ती राजनीति करते हुए, प्रश्न उठा रहे हैं, उन्होंने अविलंबनीय लोकमहत्व के विषय पर, नियम 139 के तहत किसानों के मुद्दे पर चर्चा की जो मांग की, वह दरअसल भाजपा के प्रादेशिक नेतृत्व के सामने अपना प्रभुत्व दिखाने और श्रेय लेने की राजनीति के सिवाय और कुछ नहीं था, लेकिन उनके इस प्रयास पर पार्टी में उनके दूसरे प्रतिद्वंदी और नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने, यह कहकर पानी फेर दिया की ''यदि नंबर एक और नंबर दो का इशारा हो जाये, तो हम 24 घंटे में सरकार गिरा देंगे।'' इसके बाद शिवराज सिंह द्वारा उठाया गया मुद्दा गौण हो गया और कुछ ही घंटों में ''दंड विधि संशोधन विधेयक'' पर बसपा विधायक संजीव सिंह (संजू) द्वारा मांगे गये मत-विभाजन के बाद, कांग्रेस के पक्ष में गिरे 122 मतों से, भाजपा के अहंकारी नेताओं के बड़बोलेपन की पोल खुल गई, दरअसल शिवराज सिंह और गोपाल भार्गव में प्रदेश भाजपा के नेतृत्व और श्रेय लेने की होड़ के कारण ही भाजपा की यह दुर्दशा और फजीहत हुई। श्रीमती ओझा ने कहा कि जो भाजपा कांग्रेस पार्टी की सरकार के लिए गड्ढा खोदने का काम कर रही थी, वह अंतत: अपने ही गड्ढे में गिर गई, अब भाजपा को यह समझ लेना चाहिए कि भ्रष्टाचार के द्वारा कमाये गये धनबल से, हर चीज नहीं खरीदी जा सकती, कांग्रेस पार्टी के विधायकों ने मत विभाजन के दौरान अपनी एकता से, यह सिद्ध कर दिया है कि भाजपा का कोई भी हथकंडा, कांग्रेस पार्टी को तोड़ने की ताकत नहीं रखता और अगले 5 वर्षों तक पार्टी के सभी विधायक, अपने मंत्रियों के साथ मिलकर, लोकप्रिय मुख्यमंत्री  कमलनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को नई उंचाइयों पर ले जाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।


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