जनता को स्वास्थ्य का 'कानूनी अधिकार' देने 'राईट-टू-हेल्थ


-स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट बोले-मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य ठीक करने की बड़ी चुनौती


भोपाल। जिंदगी को रखना हो खुशहाल तो रखें स्वास्थ्य का ख्याल। इसी तर्ज पर प्रदेश सरकार अब मध्यप्रदेश को देश का सर्वाधिक स्वस्थ्य प्रदेश बनाने के लिये 'राईट-टू-हेल्थ' के जरिये नागरिकों को स्वास्थ्य का कानूनी अधिकार देकर नि: शुल्क जाचें, नि:शुल्क उपचार, नि:शुल्क औषधियां और चिकित्सकीय नि: शुल्क परिवहन उपलब्ध करायेगी। राजधानी में गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने बताया कि राईट-टू-हेल्थ को कानूनी रूप तैयार करने के लिए एक ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया गया है, जो सभी व्यवहारिक, कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर गौर करते हुए मसौदा तैयार करेगी। ड्राफ्टिंग कमेटी द्वारा तैयार किया गया मसौदा एडवायजरी बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा। इस बोर्ड में लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी अध्यक्ष, पीएचएफआई, डॉ. के. सुजाता राव, एके शिवकुमार, डॉ. वी. विजयकुमार डायरेक्टर एनएलआईयू, डॉ. वंदना गुरनानी अति. स्वास्थ्य सचिव भारत सरकार व अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। सिलावट ने कहा कि हमारी हर संभव कोशिश होगी कि हम विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र में 'राईट-टू-हेल्थ' विधेयक अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करें। मंत्री सिलावट ने कहा कि मैं जानता हूं कि वंचित वर्ग की पीड़ा मुझसे अधिक कोई और नहीं समझ सकता। आज सबसे बड़ी चुनौती 'मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य ठीक करने की है। मैं गवाह हूं, मैंने बेबसी और गरीबी को भोगा है, जिया है, गरीब परिवार का एक सदस्य भी बीमार हो जाये तो पूरा परिवार आर्थिक रूप से तबाह हो जाता है। इसलिए हम सब चाहते हैं कि प्रदेश के नागरिकों के स्वास्थ्य का ख्याल सरकार रखे और वो भी उसे कानूनी अधिकार देकर। स्वास्थ्य मंत्री सिलावट ने कहा कि हमारी सरकार को मध्यप्रदेश भीषणतम बीमारी की हालत में सौंपा गया। कई बच्चे कुपोषण का शिकार थे, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर सर्वाधिक थी, चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की बेहद कमी थी अर्थात पूरे प्रदेश को बीमारियों ने घेर रखा था। मगर हम संकल्पबद्ध है इसलिए हमने 'राईट-टू-हेल्थ' की पहल की और मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जो अपने नागरिकों को स्वास्थ्य का कानूनी अधिकार देगा।


प्रत्येक वार्ड में होगी संजीवनी क्लीनिक:


सिलावट ने बताया कि प्रदेश के महानगरों के प्रत्येक वार्ड में संजीवनी क्लीनिक प्रारंभ किये जायेंगे। 4366 संविदा पैरा-मेडिकल पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जायेगी एवं एनएचएम के अंतर्गत 279 संविदा होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति शीघ्र की जायेगी। साथ ही एनएचएम के अंतर्गत 351 संविदा आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी, 80 संविदा यूनानी चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती भी शीघ्र की जायेगी। अगले ढाई वर्षों में 10 हजार कम्यूनिटी हेल्थ आफीसर्स और एनएचएम के अंतर्गत 42 संविदा दन्त शल्य चिकित्सकों की भर्ती भी शीघ्र की जायेगी।


मुख्यमंत्री सुषेण संजीवनी योजना प्रारंभ होगी: 


स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश के हर वर्ग और हर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता चाहती है, इसलिए हमने मुख्यमंत्री सुषेण संजीवनी योजना प्रारंभ करने का मानस बनाया है, जिसे हम मध्यप्रदेश के 20 जिलों के 89 अधिसूचित विकासखंड़ों में प्रारंभ करने जा रहे हैं। साथ ही हेल्थ इन्वेस्टर्स पॉलिसी और फार्मा पॉलिसी को आकार दे रहें हैं तथा चिकित्सकों के लिए चिकित्सालयों में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक अनिवार्य उपलब्धता का निर्णय ले चुके हैं।


जल्द पूरी होगी स्टाफ की कमी:


सिलावट ने बताया कि चिकित्सकों एवं चिकित्सालय से जुड़े स्टाफ की कमी को पूरा किये बगैर हम अपने लक्ष्यों को हॉसिल नहीं कर सकते। इसलिए हमने इसे प्राथमिकता से लेते हुए प्रदेश में अब तक 600 संविदा एनएचएम चिकित्सकों, 1002 बंधपत्र चिकित्सकों तथा 547 पीएससी बैकलॉग चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है। साथ ही 100 सेवानिवृत्त चिकित्सकों की सीधी भर्ती प्रक्रियाधीन है। इस प्रकार हमने कुल 2249 चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र दिये हैं। इसी प्रकार 1033 स्टॉफ नर्सों की नियुक्ति की गई तथा 760 स्टॉफ नर्सों की भर्ती प्रक्रियाधीन है। साथ ही 2019 एएनएम की भर्ती की प्रक्रिया प्रक्रियाधीन है तथा 1550 कम्युनिटी हेल्थ आफीसर्स की नियुक्ति की गई है।


जड़ से मिटा देंगे मिलावटखोरी:


स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने बताया कि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में मिलावटखोरी के कारोबार के खिलाफ कार्यवाही को गंभीरता से नहीं लिया और नमूनों की जांच के लिए मानक स्तर की एक मात्र प्रयोगशाला भोपाल में स्थापित की। हमने, इसको गंभीरता से लेते हुए तत्काल तीन आधुनिक प्रयोगशालाएं इंदौर, ग्वालियर एवं जबलपुर में स्थापित करने की न सिर्फ स्वीकृती प्रदान की, अपितु उनका भूमिपूजन भी कर दिया गया। इतना ही नहीं अतिरिक्त दो नई प्रयोगशाला सागर और उज्जैन में भी प्रारंभ की जायेंगी। इसके अतिरिक्त दो आधुनिक चलित खाद्य प्रयोगशाला भी संचालित की जा रही हैं तथा दो और नवीन चलित खाद्य प्रयोगशाला प्रारंभ करने की योजना है।मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने मिलावट मुक्त मध्यप्रदेश का बीड़ा उठाया है। 'शुद्ध के लिए युद्धÓ अभियान के तहत 19 जुलाई से 18 नवम्बर 2019 तक दूध एवं दुग्ध उत्पादों, अन्य पदार्थों/ पान मसाला सहित कुल 9283 नमूने जांच के लिए लिये गये हैं। अभी तक मिलावटखोरी करने वाले कारोबारियों के विरूद्व 94 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 32 कारोबारियों के खिलाफ रासूका की कार्यवाही की गई है। जिसमें आज दिनांक तक 3ई963 नमूनों की जांच में 840 अवमानक, 231 मिथ्या छाप, 42 मिलावटी, 38 असुरक्षित और 30 प्रतिबंधित नमूने पाये गये हैं।


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