अधीर न हो, कमलनाथ सरकार सबकी सरकार है, सबकी सुनेगी


मध्यप्रदेश में 15 वर्षों बाद सत्ता में परिवर्तन हुआ है। पिछली सरकार भाजपा से जुड़े अधिकारियों दलालों और नेताओं के इर्द गिर्द थी। शिवराज सरकार को कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के सरदार मनमोहन सिंह ने दिल खोल कर पैसा दिया। वो पैसा विकास पर कम और भ्रष्टाचार की भेंट ज्यादा चढ़ा। नही तो क्या कारण है कि शिवराज सिंह चौहान पूरे प्रदेश में घूम घूम कर गरीबों और किसानों को न्याय दिलाने की बात करते फिर रहे हैं। वे अपने गिरेबां में झांकते क्यों नही, क्यों नही वे अपनी आत्मा से पूछते कि उन्होंने 15 साल प्रदेश के विकास के लिए क्या किया? क्योंकि कुछ किया होता तो विपक्ष में रहने के बाद खुद को भी वो "स्वर्णिम विकास" दिखाई तो देता। योजनाओं का पैसा जनता के हितों में न लगकर सिर्फ एक ही विचारधारा के लिए खर्च होता था। पटवारी चेहरा देखकर किसानों के नुकसान का सर्वे करते थे। यहां तक कि जिन गांवों से बीजेपी को वोट नही मिलता था उनमें से कई गांवों के पानी और बिजली के कनेक्शन काट दिए गए। जो लोग कांग्रेस को समर्थन दे रहे थे वे सभी उपेक्षित रहे। लेकिन वे अडिग रहे डरे नही उनके व्यवसाय खत्म हो गए लेकिन झुके नही उन्होंने अपनी विचारधारा को मजबूती से पकड़े रखा सिर्फ इस आस में कि एक न एक दिन अंधकार मिटेगा। अब जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है तो प्रदेश के हर गांवों और नगरों में संघर्ष करने वाला व्यक्ति अपनी उम्मीदें लगाकर बैठा है कि जो अन्याय उनके साथ पिछली सरकार ने किया उससे अब उन्हें राहत मिलेगी। हर व्यक्ति अपने गांव अपने शहर के विकास का खाका बनाकर बैठा है उसे लगता है कि उनका उपेक्षित क्षेत्र अब संवर जाएगा। समस्या काँग्रेस सरकार की नीयत पर नही है। 15 सालों से जमे बीजेपी सरकार द्वारा पदस्थ अधिकारी जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। चाहे जानबूझकर बिजली कटौती का मामला हो या किसानों को धांधली करके खाद वितरण करने का, वही अधिकारी कर्मचारी बदमाशी करने से चूक नही रहे हैं। 


जिस उम्मीद से लोगों ने मध्यप्रदेश की सत्ता की बागडोर कांग्रेस को सौंपी है उसमें कांग्रेस सरकार खरी उतरती नज़र आ रही है। पिछले 11 माह में काँग्रेस सरकार ने अपने दिए वचनों को एक-एक करके पूरा करने का काम किया है। शिवराज सरकार के द्वारा खाली खजाना देने व प्रदेश को सर से पांव तक कर्ज़ में डुबोने के बाद भी विकास की तड़प रखने वाले विशनरी मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने प्रदेश के विकास को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। जहाँ इन्वेस्टर समिट से बड़े उद्योगों का मध्यप्रदेश में आना निश्चित हुआ है वहीं मेट्रो रेल जैसे असंभव काम ने भी गति पकड़ी है। जहां एक ओर लाखों किसानों का ऋण माफ हुआ है तो वहीं 1 करोड़ 86 हज़ार परिवार 100 यूनिट तक 100 रुपये बिजली बिल की "इंदिरा गृह ज्योति योजना" के अंतर्गत लाभान्वित हुए हैं।


कमलनाथ सरकार की प्रतिबद्धता ही है कि कृषि मंत्रालय ने यूरिया की काला बाज़ारी और धांधली को रोकने के लिए कॉल सेंटर खोला है। मेरे अनुमान किसी भी प्रदेश सरकार द्वारा उठाया गया ये पहला कदम है जिससे सीधे किसानों को फायदा होगा। खाद-बीज में मिलावट की रोक थाम के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। खाद्य पदार्थों खासकर दुग्ध उत्पादों में मिलावट को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग के "शुद्ध के लिए युद्ध" कार्यक्रम की पूरे देश मे सराहना हो रही है।


सरकार के सभी विभागों के मंत्री दिन-रात मेहनत करके एक स्थिर और विश्वसनीय सरकार की आधारशिला रखने का काम कर रहे हैं। शिवराज सरकार की तुलना में कमलनाथ सरकार में उच्च शिक्षित युवा और अनुभवी मंत्रियों का एक अच्छा मिश्रण है जो सामंजस्य के साथ कमलनाथ जी की योजनाओं पर काम कर रहे हैं। मंत्री गण व्यवहारिकता के साथ हर रोज़ जनता से संवाद कर त्वरित समस्याओं के निवारण का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के बारे में मशहूर है कि उनकी चक्की देर से पीसती है लेकिन बारीक पीसती है। सभी को धैर्य रखने की आवश्यकता है।


मेरी पूरी संवेदनाएं उस हर एक व्यक्ति के साथ है जिन्होंने विचारधारा की लड़ाई में समझौता नही किया। उन्होंने सरकार से जो उम्मीदें लगा रखीं हैं वे निश्चित ही पूरी होंगीं। मैं पूरे विश्वास के साथ सभी से कह सकता हूँ की अधीर न हो, कमलनाथ सरकार, सबकी सरकार है, सबकी सुनेगी!



योगेन्द्र सिंह परिहार


प्रदेश प्रवक्ता, मप्र कांग्रेस


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