20 साल से व्हील चेयर पर, पर दूसरों के चेहरे पर बिखेरी मुस्कान


भाइयों ने साथ छोड़ा तो छह गरीब बच्चियों को बनाया संपत्ति का उत्तराधिकारी
भोपाल। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की 47 साल की चंद्रकांता जेठवानी। सरकारी स्कूल में संविदा शिक्षक, ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा बीमारी से पीडि़त। इसमें शरीर की हड्डी इतनी कमजोर हो जाती है कि जरा सी चोट लगने पर टूट जाती है। इसलिए कई मल्टीपल फ्रैक्चर झेल रही चंद्रकांता चल नहीं सकतीं। व्हील चेयर पर ही रहना पड़ता है। दिव्यांगता का दर्द झेल रही चंद्रकांता दूसरों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरना चाहती हैं। इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर 50 बच्चों की स्कूल फीस भर चुकी हैं। छह गरीब लड़कियों को अपने फ्लैट और बैंक बैलेंस का उत्तराधिकारी बनाया है। आंखें और अपना शरीर दान करने की घोषणा कर दी है। वहीं, डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है कि अब किसी प्रकार की चोट लगती है तो व्हील चेयर से भी चल नहीं पाएंगी। इसलिए इच्छा मृत्यु चाहती हैं, ताकि शरीर के अंग दान के बाद काम आ सकें। इसके लिए प्रधानमंत्री को चि_ी भी लिखी। ऐसा इसलिए कि किसी तरह की दुर्घटना होने पर अंगदान नहीं हो सकता।
इसलिए मांगी इच्छा मृत्यु:
दरअसल, चंद्रकांता ने शरीर दान करने का संकल्प लिया था तो उन्हें एक सर्टिफिकेट मिला था। उस पर लिखा था किसी भी प्रकार की दुर्घटना के बाद शरीर नहीं लिया जाएगा। मेरे शरीर के अंग जरूरतमंदों के काम आए इसलिए 2017 में प्रधानमंत्री को चिट्टी लिखकर इच्छामृत्यु मांगी। पीएमओ से पत्र आया कि हम आपको इसकी इजाजत नहीं दे सकते।
अस्पताल से व्हील चेयर पर लौटी:
पार्श्वनाथ नगर निवासी चंद्रकांता बताती हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी। पापा की कैसेट की दुकान थी, जिससे हम पांच भाई-बहनों का खर्च चलता था। मैं सबसे छोटी थी। ट्यूशन पढ़ाते हुए बायो केमेस्ट्री में एमएससी की। डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन पैसे नहीं थे। बचपन से एक पैर से तिरछा चलती थी। वर्ष 2000 में चोइथराम अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टरों ने अकोला में दिखाने के लिए कहा। वहां गई तो पता चला कि मुझे ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा बीमारी है। डॉक्टरों ने छह महीने में चार सर्जरी कीं। पैर ठीक होने के बजाय खराब हो गया। 2007 में पिता का साया सिर से उठ गया। 2011 में बड़ी बहन और 2012 में मां ने भी दुनिया से रुख्सत ली। दोनों भाइयों ने सालों पहले साथ छोड़ दिया। 
टूटी हड्डियां, 6 माह रहीं बिस्तर पर: 
पहले से ही तकलीफ झेल रही चंद्रकांता के साथ 2016 में एक और हादसा हुआ। दूसरे पैर पर एक छात्रा गिर पड़ी। कई हड्डियां टूट गईं। आठ महीने तक बिस्तर पर रही। तब लगा कि बहुत जल्दी कुछ बड़ा करना चाहिए। उसी दौरान सेव चाइल्ड मिशन से जुड़ीं। फिर एमजीएम कॉलेज में शरीर और आई-बैंक एसोसिएशन हैदराबाद में आंखें दान करने की घोषणा की। वन बीएचके फ्लैट और बैंक बैंलेंस भी छह गरीब छात्राओं के नाम कर दिया। चंद्रकांता के नहीं रहने पर वकील इस फ्लैट को बेचेंगे। इससे मिलने वाले रुपए इन बच्चियों में बांटे जाएंगे। 


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