महिलाओं के लिए हेलमेट अनिवार्य क्यों नहीं?


सरकार के जवाब से कोर्ट असंतुष्ट, पक्ष रखने के लिए दी आखिरी मोहलत


भोपाल। हेलमेट की अनिवार्यता से महिलाओं को छूट देने के प्रावधान को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भोपाल के एक लॉ स्टूडेंट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मध्य प्रदेश व्हीकल एक्ट 1994 में बदलाव की मांग की है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के हिमांशु दीक्षित ने हेलमेट की अनिवार्यता से छूट के प्रावधान को गलत बताया है। छात्र के अनुसार सूबे में सड़क हादसों के दौरान हुई महिलाओं की मौत की संख्या काफी अधिक है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टिकोण से महिलाओं को भी हेलमेट लगाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले पर मंगलवार को सुनवाई की और छात्र की दलील सुनी।


सड़क दुर्घटनाओं में 580 महिलाओं की मौत


लॉ स्टूडेंट ने बताया कि वर्ष 2015 से 2019 तक 2142 सड़क हादसों में करीब 580 महिलाओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में मध्य प्रदेश मोटर व्हीकल एक्टर 1994 में बदलाव करना बेहद जरूरी है। छात्र ने बताया कि इस एक्ट के आर्टिकल 15(1) और आर्टिकल 21 के तहत महिलाओं को हेलमेट लगाना अनिवार्य नहीं है। इससे महिलाओं की जान को खतरा है।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
यह जनहित याचिका (पीआईएल) पांच अक्टूबर को कोर्ट में दायर की गई थी। इस याचिका के दायर होने के बाद सुनवाई के दौरान 21 अक्टूबर को प्रमुख सचिव, प्रिंसिपल सेक्रेटरी ट्रांसपोर्ट विभाग और प्रिंसिपल सेक्रेटरी लॉ एंड लेजिस्लेटिव अफेयर्स को नोटिस जारी किए गए थे। मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट पक्षकारों की ओर से आए जवाब पर नाराज दिखा और संतुष्ट नहीं था। इसके बाद अब सरकार को इस संबंध में अपना पख रखने के लिए अंतिम मोहलत दी गई है। अब मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी।
खोखले साबित हो रहे दावे
कोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता छात्र ने कहा कि सरकार एक तरफ म?हिला सशक्तिकरण के दावे कर रही है, निशुल्क (मुफ्त) ड्राइविंग लाइसेंस बना रही है लेकिन हेलमेट अनिवार्य न होने से सभी बातें खोखली साबित हो रही हैं। इस दौरान छात्र ने दिल्ली और चंडीगढ़ में अपनाए जा रहे मॉडल की भी तारीफ की और उसे उदाहरण के रूप में लेने की जरूरत बताई।


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