रक्तदान में रेडक्रास को गोल्डन बुक ऑफ वल्र् रिकॉर्ड का खिताब


-कर्मचारियों के जोश, उत्साह एवं भोपाल वासियों की जागरूकता से बना रिकार्ड
भोपाल। भारतीय रेडक्रास सोसायटी शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मप्र रेडक्रास राज्य शाखा द्वारा 24 घण्टे में रक्तदान शिविर को लेकर विश्व रिकार्ड बनाया है। रेडक्रास के कर्मचारियों और भोपाल वासियों ने देश और दुनिया में लगातार रक्तदान करने में अहम भूमिका निभाकर रेडक्रास को नये कीर्तिमान के साथ दिलाया गोल्डन बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड का खिताब। म.प्र. रेडक्रॉस सोसायटी के विश्व रिकार्ड बनने पर उत्साही रेडक्रास कर्मचारियों को ने डोल नागड़ों एवं आतिशी बाजी कर खुशी मनाई। पूरे शिविर में आने वाले ब्लड डोनर्स का रिकार्ड और सत्यापन गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड के एशिया हेड डा. मनीष विश्नोई की निगरानी में किया गया और आज दिनांक 21.02.2020 को प्रात: 6.15 पर गोल्डन बुक ऑफ विश्व रिकार्ड का प्रमाण पत्र रेडक्रास राज्य शाखा के चेयरमैन आशुतोष रसिक बिहारी पुरोहित एवं जनरल सेके्रटरी  डॉ. प्रार्थना जोशी को प्रदान किया गया। इस अवसर पर रेडक्रास राज्य शाखा की प्रबंध समिति के सदस्य दीपक सिंह राजपूत सहित रेडक्रास के समस्त कर्मचारी उपस्थित थे। 
मप्र रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमेन आशुतोष पुरोहित ने बताया कि गुरूवार सुबह 6.10 पर रक्तदान शिविर का शुभारंभ हुआ था। इसका समापन शुक्रवार की सुबह ठीक 6 बजकर 10 मिनट किया गया। 288 रक्तदाताओं ने रक्तदान कर भारतीय रेडक्रास सोसायटी म.प्र. राज्य शाखा को गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड का खिताब दिलाया। पुरोहित ने बताया कि यह वल्र्ड रिकॉर्ड की म.प्र. रेडक्रास राज्य शाखा के टीम की जीत हमारें रेडक्रास राज्य शाखा एवं  हॉस्पिटल के कर्मचारियों की कड़ी मेहनत का नतीजा है।  रेडक्रास सोसायटी की जनरल सेके्रटरी डा. प्रार्थना जोशी ने बताया कि राष्ट्रीय मुख्यालय के दिशा निर्देश पर आयोजित रक्तदान शिविर को भव्य रूप दिये का निर्णय चेयरमैन आशुतोष पुरोहित द्वारा लिया गया था, जो रेडक्रास के कर्मचारियों के अथक प्रयासों से सफल हुआ है। निश्चित ही रूप से समाज में रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियां भी दूर होंगी कि 24 घण्टे में व्यक्ति कभी समय रक्तदान कर किसी का जीवन बचा सकता है। 
इस ऐतिहासिक रक्तदान शिविर के विश्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने एआरआई नर्सिंग कॉलेज,कॉर्पोरेट वर्क ऑफ इंस्टीट्यूशंस, पीसीडीएस भोपाल, एमवीएम कॉलेज, भोपाल की यूथ ब्लड डोनर असमा खान के अलावा एक दर्जन शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं और छात्र-छात्राओं ने रक्तदान कर गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया।


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