बरमूडा त्रिकोण का रहस्य सामने आया


बरमूडा ट्राएंगल अमेरिका के फ्लोरिडा, प्यूर्टोरिको और बरमूडा तीनों को जोड़ने वाला एक ट्रायंगल यानी त्रिकोण हैI हजारों जहाज आज तक बरमूडा से वापस नहीं आए हैं जिस कारण इस जगह जाने से हर किसी को डर लगता हैI इस जगह के बारे में ऐसा कहा जाता है कि बरमूडा के रहस्य को कोई सुलझा नहीं पाता है। ना जाने कितने ही शिप और एयर प्लेन्स को ये सागर अपने आप में समां चुका है। एक बार जो इसकी सीमा में प्रवेश कर जाता है वो कभी लौट कर नहीं आ पाता है लेकिन एक घटना ने सबको हिला कर रख दिया है। एक जहाज 90 साल बाद इस रहस्यमयी ट्रायएंगल से लौट आया। बरमूडा के बारे में कहा जाता है कि यह ऐसा रहस्यमय क्षेत्र है जहां पर वायुयान और जलयान रहस्यमयी रूप से लापता होते हैं




जब लापता जहाज का यह राज पता चला



मैरी सेलेस्टी नाम का एक व्यापारिक जहाज बरमूडा ट्राएंगल क्षेत्र में लापता हो गया था। 4 दिसम्बर 1872 को अटलांटिक महासागर में यह पाया गया। इस जहाज पर सवार यात्री और जहाज के कर्मचारी का कोई पता नहीं चला। शुरू में यह माना गया कि जहाज समुद्री डाकुओं द्वारा लूट लिया गया होगा। लेकिन जहाज पर कीमती सामानों के सुरक्षित होने से डाकुओं द्वारा जहाज को लूट लिए जाने की बात साबित नहीं हो सकी।


मैरी सेलेस्टी जहाज तरह की 1881 में एलिन ऑस्टिन नाम का जहाज यहां आकर गायब हो गया। एलिन ऑस्टिन नाम का एक जहाज कुशल चालकों के साथ न्यूयार्क के लिए रवाना हुआ। यह जहाज बरमूडा ट्राएंगल के पास रास्ते में कहीं खो गया। जब यह जहाज मिला तो जहाज पर सवार किसी व्यक्ति का कुछ पता नहीं चला।


अमेरिका के लेफ्टिनेंट कमांडर जी डब्ल्यू वर्ली 309 क्रू सदस्यों के साथ यूएसएस साइक्लोप्स नाम के जहाज से सफर कर रहे थे। बरमूडा ट्राएंगल को पार करते समय यह जहाज कहां खो गया कुछ पता नहीं चला। जिस दिन यह घटना हुई थी, उस दिन मौसम भी अनुकूल था। क्रू के सदस्य संदेश भेज रहे थे कि सब कुछ ठीक चल रहा है। लेकिन अचानक मंजर बदल गया और जहाज किस दुनिया में खो गया, कोई जान नहीं पाया।


बरमूडा ट्राएंगल में गायब हुए हवाई जहाज:



इस क्षेत्र से गुजरने वाले कई हवाई जहाजों का भी कोई अता-पता नहीं है। फ्लाईट 19, स्टार टाईगर, डगलस डीसी-3 बरमूडा ट्राएंगल में गुम होने वाले हवाई जहाजों के नाम हैं।


 बरमूडा त्रिभुज का रहस्य :


हेक्सागॉनल क्लाउड्‍स (Hexagonal clouds)  जो हवा में एक बम विस्फोट की मौजूदगी के बराबर की शक्ति रखते हैं और इनके साथ 170 मील प्रति घंटा की रफ़्तार वाली हवाएं होती हैं। ये बादल और हवाएं ही मिलकर पानी और हवा में मौजूद जहाजों से टकराते हैं और फिर वे कभी नहीं मिलते। 5 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला ये इलाका पिछले कई सौ सालों से बदनाम रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बेहद तेज रफ्तार से बहती हवाएं ही ऐसे बादलों को जन्म देती हैं। ये बादल देखने में भी बेहद अजीब रहते हैं और एक बादल का दायरा कम से कम 45 फीट तक होता है। इनके आकार के कारण इन्हें हेक्सागोनल क्याउड्‍स (षटकोणीय बादल) कहा जाता है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये हवाएं इन बड़े बड़े बादलों का निर्माण करती हैं और एक विस्फोट की तरह समुद्र के पानी से टकराते हैं और सुनामी से भी ऊंची लहरे पैदा करते हैं जो आपस में टकराकर और ज्यादा ऊर्जा पैदा करती हैं। इस दौरान ये अपने आस-पास मौजूद सब कुछ बर्बाद कर देते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक ये बादल बरमूडा आइलैंड के दक्षिणी छोर पर पैदा होते हैं और फिर करीब 20 से 55 मील का सफर तय करते हैं।


कोलराडो स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर और मीट्रियोलोजिस्ट (मौसमविज्ञानी) डॉ. स्टीव मिलर ने भी इस दावे का समर्थन किया है। उन्होंने भी दावा किया है कि ये बादल अपने आप ही पैदा होते हैं और इनका पता लगा पाना भी बेहद मुश्किल है।


 




 


 


 


Comments

Popular posts from this blog

मंत्री भदौरिया पर भारी अपेक्स बैंक का प्रभारी अधिकारी

"गंगाराम" की जान के दुश्मन बने "रायसेन कलेक्टर"

भोपाल, उज्जैन और इंदौर में फिर बढ़ाया लॉकडाउन