गंगाराम को भूमिहीन बनाने में तुले तहसीलदार एवं पटवारी


-40 साल पुराने कब्जे को रसूख के बल पर अवैध साबित करने की कोशिश, ताक पर नियम कायदे


भोपाल। आजादी के 73 साल बाद भी राजस्व महकमे में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की तरह अंग्रेजों का जंगलराज कायम है। हालत यह है कि पटवारी से लेकर राजस्व निरीक्षक  एवं तहसीलदार कब किसे भूमि स्वामी बता दे और कब किसे अवैध कब्जाधारी बता दें कुछ कहा नहीं जा सकता। राजस्व अफसरों की इसी मनमानी का शिकार प्रदेश के रायसेन जिले की गौहरगंज तहसील का एक किसान गंगाराम इन दिनों अपनी ही जमीन से बेदखल हो न्याय की गुहार लगाये गौहरगंज से लेकर राजधानी भोपाल तक राजस्व विभाग के बड़े अफसरों से लेकर मंत्री, मुख्यमंत्री तक न्याय की उम्मीद में यहां गलियों की खाख छान रहे हैं।  
इस सम्बंध में सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रायसेन जिले गौहरगंज तहसील के ग्राम घाटखेड़ी निवासी गंगाराम के सिर पर मानो मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा जो। मुसीबत भी ऐसी की कुछ सूझ भी नहीं रहा है। दरअसल राजस्व विभा के अफसरों ने गंगाराम के साथ जो षड़यंत्र रच दिया है वह उन्हें दर-दर भटकने के लिए पर्याप्त है। गौहरगंज की राजस्व निरीक्षक शुभा मरकाम एवं तहसीलदार संतोष बिठौरिया, जिन्होंने महकमे में भ्रष्टाचार के झंडे गाड़ रखे हैं, ने  चंद रुपयों की खातिर महज एक महिला शोभा चौकसे से आवेदन प्राप्त कर 1980 यानी 40 साल के कब्जाधारी भूमि स्वामी कृषक गंगाराम पिता रामकिशन मीणा निवासी घाटखेड़ी को उनके भूमि खसरा नम्बर 59/4 रकबा 1.822 से धान की खड़ी फसल के बाद भी बेदखल कर दूसरे को कब्जा सौंपने का आदेश जारी कर दिया। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि  राजस्व निरीक्षक शुभा मरकाम की जिस रिपोर्ट को आधार बनाकर गौहरगंज तहसीलदार संतोष बिठौरिया ने प्र.क./0004/ अ-70/2020-21 में यह गलत फैसला दिया है। वह रिपोर्ट ही संदिग्ध है। दरअसल राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी ने ग्राम के चौकीदार की जो टीप बनवाई वह भी सही नहीं है। जमीन के कब्जे का जो पंचनामा तैयार किया वह राजस्व विभाग के नियम कायदे के अनुरूप न करके गंगाराम की जमीन हड़पने के हिसाब से तैयार किया है, ताकि मनमानी पूर्वक कार्रवाई कर सकें और अपने इस प्रयास में सफल भी रहे। कृषि भूमि खसरा नम्बर 59/4, जिस पर सन 80 से गंगाराम का कब्जा चला आ रहा है उसकी बेदखली का आदेश उनके पुत्र राजाराम के नाम जारी किया गया जबकि वह कुछ सालों से रायसेन जिला मुख्यालय में रहकर अपना जीविकोपार्जन कर रहे हैं। इतना ही नहीं जब आदेश ही किया तो राजाराम को धारा 32 में अन्यत्र सुनवाई के अवसर भी नहीं  प्रदान किया। यह सब इस बात का प्रमाण है कि एक महिला आवेदक पर किस तरह मेहरबानी कर वास्तविक भूमि स्वामी को परेशान किया जा रहा है।


राजस्व अधिनियम की उड़ाई धज्जियां : 


गंगाराम को भूमि से बेदखल करने की योजना में राजस्व विभाग के अफसर तहसीलदार गौहरगंज एवं पटवारी तथा राजस्व निरीक्षक इतने अंधे बन गए कि उन्होंने राजस्व अधिनियम की धाराओं के उल्लंघन से कोई गुरेज नहीं किया। राजस्व अधिनियम की धाराओं में यह प्रावधान है कि किसी भी कृषक के खेत में खड़ी फसल के दौरान न तो सीमांकन कार्य किया जाता है न उस दौरान किसी और को जमीन का कब्जा दिया जाता है। वैसे भी 15 जून से 15 सितंबर तक सीमांकन कार्य बंद रहता है।  इसके बावजूद तहसीलदार ने धान की खड़ी फसल के बीच गंगाराम की जमीन का कब्जा फर्जी सीमांकन की आड़ में किसी अन्य को सौंपने का आदेश आनन- फानन में जारी कर दिया। 


गंगाराम को डराने बदमाश का लिया सहारा :


कृष्ण गंगाराम की जमीन को हड़पने के लिए राजस्व अफसरों एवं शोभा चौकसे को इतनी जल्दी है कि एक तरफ उन्हें कानूनी फैसले से परेशान किया जा रहा है तो दूसरी तरफ  गंगाराम की जमीन पर दावा करने वालों ने इलाके के बदमाश बाबू खां के गुंडों ने जबरन कब्जा कर लिया है। बदमाश गंगाराम को हर तरह से डराने का प्यास कर रहे हैं। जिससे वह यहां से छोड़कर अन्यत्र चले जाएं।


हर जगह शिकायत पर नहीं सुनी फरियाद :


मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है कि कृषक गंगाराम ने अपने साथ हो रहे इस अन्याय के खिलाफ शिकायत लेकर तहसीलदार गौहरगंज से लेकर कलेक्टर रायसेन, पुलिस अधीक्षक रायसेन और राजस्व विभाग के आला अफसरों तथा राजस्व मंत्री एवं मुख्यमंत्री तक, रायसेन से भोपाल दर-दर भटक रहे हैं । इसके बावजूद कोई भी नेता या अफसर उनकी फरियाद सुनने को तैयार नहीं है।


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