जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा किसके इशारे पर स्थगित की गई ?


सरकार उम्मीदवारों को आर्थिक क्षति की भरपाई करे : भूपेन्द्र गुप्ता


भोपाल । प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड द्वारा जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा को अचानक रद्द करने में फिर से व्यापम के जैसे हथकंडो की बू आने लगी है। प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्र गुप्ता ने जेल प्रहरी भर्ती परीक्षा स्थगित किए जाने को आपत्तिजनक बताया है।पीईबी के अध्यक्ष केके सिंह बतायें कि किस खासव्यक्ति केइशारे पर उन्होंने बिना सोचे समझे अचानक परीक्षा स्थगित कर दी? उन्होंने कहा कि केवल तीन सेंटरों के फेर में 67 सेंटरों के तीन लाख उम्मीदवारों को परेशानी में डाला गया है। ऐसा लगता है कि भले ही व्यापम का नाम बदलकर पीईबी कर दिया गया हो किंतु अभी भी व्यापम वाली कारगुजारियां जारी हैं ।जिन तीन सेंटरों को बदला गया है उन्हें वापिस यथावत भी रखा जा सकता था।वे उसे न बदलने देते।किंतु इस छोटी सी अव्यवस्था के कारण पूरी परीक्षा स्थगित करने के पीछे भविष्य में किये जाने वाले किसी बड़े षड़यंत्र का स्पष्ट आभास हो रहा है।
गुप्ता ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि लाखों गरीब उम्मीदवारों को जो आर्थिक नुकसान हुआ है उसकी भरपाई कौन करेगा? बार-बार परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां बदलकर अपनी छवि बचाने की कोशिश में लगा पीईबी अंदर हो रही कारगुजारियों पर रोक क्यों नहीं लगाता? गुप्ता ने मांग की कि उम्मीदवारों की आर्थिक क्षति की भरपाई पीईबी करे।जो लोग इस फैसले से प्रभावित हुए हैं उन्हें भी अपने मानव अधिकारों के लिये आवाज उठानी चाहिये, नहीं तो यह सरकार भविष्य में भी ऐसा ही करती रहेगी।
गुप्ता ने शिक्षक भर्ती को अटकाये रखने को भी बेरोजगार नौजवानों के साथ अत्याचार बताया है। उन्होंने मांग की कि तत्काल शिक्षकों के नियुक्ति आदेश निकाले जाएं, ताकि तीन साल पहले की भाजपा सरकार के अन्याय का निराकरण हो सके।


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