अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच, मध्यप्रदेश इकाई द्वारा कहानी-पाठ गोष्ठी का आयोजन



भोपाल। अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच, मध्यप्रदेश इकाई की कहानी-पाठ गोष्ठी 28-10-2021 को गूगल मीट पर  सम्पन्न हुई। कार्यकम की अध्यक्षता करते हुए राज बोहरे ने कहा कि कहानी अभी भी साहित्य की प्रमुख विधा है। वो कभी हाशिए पर नहीं जा सकती। इसके साथ ही उन्होंने कहानीकारों की कहानियों पर सार्थक टिप्पणी और सुझाव दिये। 

मुख्य अतिथि इक़बाल मकसूद ने कहा कि हमारी धार्मिक कथाओं जैसे महाभारत, रामायण में धीरे–धीरे बहुत सारी अतिरिक्त कथाएँ जुड़ती जाती हैं, यही किस्सागोई है। आपने भी पढ़ी गई कहानियों पर सार्थक सुझाव और गंभीर टिप्पणी दी। 

स्वागत वक्तव्य में संस्था की संस्थापक-अध्यक्ष सुश्री संतोष श्रीवास्तव ने कहा, हिंदी कहानियों का इतिहास भारत में सदियो पुराना है। प्राचीन काल से ही कहानियां भारत में बोली, सुनी और लिखी जा रही है। जब लिखने की सुविधा नहीं थी तो मौखिक कहानियां पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होती थी और वही लोक गाथाएं बन जाती थीं। ये कहानियां ही है जो हमें हिम्मत से भर देती है और हम असंभव कार्य को भी करने को तैयार हो जाते है और अत्यंत कठिनाइयों के बावजूद ज्यादातर कार्य पूरे भी होते है। कहानी–पाठ गोष्ठी इस दिशा में एक कदम है। 

कार्यक्रम का संचालन सुश्री महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने किया। सुमधर सरस्वती वंदना सुश्री नविता जौहरी ने प्रस्तुत की। आभार प्रदर्शन मंच के वरिष्ठ और समर्पित साथी चरणजीत सिंह कुकरेजा ने दिया। कार्यक्रम में सुश्री कमल चंद्रा ने अपनी कहानी ‘हरसिंगार’’, सुश्री जया केतकी ने ‘प्रतिशोध’ और मुज़फ्फ़र इक़बाल सिद्दीकी ने ‘माटी की सुगंध’ कहानियाँ पढ़ीं। कहानियों की विस्तृत समीक्षा के साथ मार्गदर्शन और सुझाव क्रमशः सुश्री मधु सक्सेना, सुश्री शेफालिका श्रीवास्तव और डॉ॰ विनीता राहुरिकर ने दिये। कार्यक्रम अत्यंत सफल और बेहद रोचक रहा।

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