आजाद भारत को समृद्ध बनाने में चाचा नेहरू का अहम योगदान रहा : राशिदा मुस्तफा



-महिला कांग्रेस उत्पीड़न निवारण विभाग ने बच्चों के साथ मनाई चाचा नेहरू की जयंती

भोपाल। देश के प्रथम प्रधानमंत्री एवं आधुनिक भारत के निर्माता पंडित जवाहरलाल नेहरु की जयंती राजधानी में पूरे जोश खरोश के साथ मनाई गई। कई स्थानों पर चाचा नेहरू को याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस उत्पीड़न निवारण विभाग की ओर से भी पंडित नेहरू को याद कर बच्चों को फल आदि वितरित किए। मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस उत्पीड़न निवारण विभाग की ओर से बाल दिवस के अवसर पर एहसान कालोनी करोंद में पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर बच्चों के साथ मिलकर श्रद्धांजलि अर्पित कर चाचा नेहरू को याद किया तथा फल और बिस्कुट आदि वितरित किया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस उत्पीड़न निवारण की प्रमुख राशिदा मुस्तफा, मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस के  प्रदेश सचिव हुमैद शकील सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के नागरिक भी मौजूद थे। इस अवसर पर बच्चों को सम्बोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस उत्पीड़न निवारण की प्रमुख राशिदा मुस्तफा ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू आधुनिक भारत के निर्माता थे। देश की आजादी से लेकर आजाद भारत को समृद्ध बनाने तक उनका अहम योगदान रहा। राशिदा मुस्तफा ने कहा कि पंडित नेहरू ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई थी। आजादी की लड़ाई में उन्हें नौ बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि भारत के आजाद होने के बाद पंडित नेहरू ने शिक्षा, सामाजिक सुधार, आर्थिक क्षेत्र, राष्ट्रीय सुरक्षा और औद्योगीकरण सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य करके देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने का काम किया। देश के पहले प्रधानमंत्री के तौर पर उन्‍होंने आधुनिक भारत के निर्माण की पूरी कोशिश की। 1950 में भारतीय संविधान लागू होने के बाद उन्होंने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सुधारों के एक महत्त्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की। नेहरू को विदेश नीति में, भारत को दक्षिण एशिया में एक क्षेत्रीय नायक के रूप में और गुटनिरपेक्ष आंदोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाने के लिए भी याद किया जाता है।



राशिदा ने कहा कि देश को विकास के पथ पर लाने के लिए उन्‍होंने योजना आयोग का गठन किया। उनकी नीतियों के कारण देश में कृषि और उद्योग का एक नया युग शुरु हुआ। उन्‍होंने ही जोसिप बरोज टिटो और अब्दुल गमाल नासिर के साथ मिलकर एशिया और अफ्रीका में उपनिवेशवाद के खात्मे के लिए एक गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत की। इसके अलावा वे कोरियाई युद्ध का अंत करने, स्वेज नहर विवाद सुलझाने और कांगो समझौते को मूर्तरूप देने जैसे अन्य अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में मध्यस्थ की भूमिका में रहे। इनके अलावा उन्‍होंने पर्दे के पीछे रहते हुए पश्चिम बर्लिन, ऑस्ट्रिया और लाओस के जैसे कई अन्य विस्फोटक मुद्दों के समाधान में भी अहम भूमिका निभाई। उन्हें वर्ष 1955 में भारत के सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

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