चंद्रग्रहण के वैज्ञानिक तथ्यों पर न लगायें ग्रहण : सारिका घारू



-मप्र के 26 पूर्वी जिलों में दिखेगा उपछाया ग्रहण लेकिन होशंगाबाद, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, खरगौन, रायसेन, अलीराजपुर में  नहीं

भोपाल। 19 नवम्बर को चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना होने जा रही है। यह होशंगाबाद, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, खरगौन, रायसेन, अलीराजपुर जिले में न ता घटित हो रही है और न हीे देखा जा सकेगा लेकिन मध्यप्रदेश के पूर्वी 26 जिलों में उपछाया ग्रहण की घटना घटित होगी। इस खगोलीय घटना की जानकारी देते हुये नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि उपछायाग्रहण की घटना को खाली आंखों से महसूस नहीं किया जा सकता है। क्योंकि चंद्रमा की चमक कुछ ही कम होती है।  

सारिका ने पोस्टर एवं माॅडल की मदद से बताया कि जब परिक्रमा करती हुई पृथ्वी ,चंद्रमा और सूर्य की  आकाश में इस प्रकार स्थिति बनती है कि सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तब चंद्रमा पर पृथ्वी की परछाई पड़ने लगती है । इसे चंद्र ग्रहण कहते हैं। पृथ्वी की दो प्रकार की छाया बनती है, घनी छाया और इसके आसपास हल्की उपछाया। 



सारिका ने बताया कि अगर चंद्रमा पूरी तरह घनी छाया वाले भाग में आ जाता है तो चंद्रमा लाल तामिया रंग का दिखाई देने लगता है। यह पूर्ण चंद्रग्रहण होता है। जब चंद्रमा इस प्रकार की स्थिति में हो कि उसका कुछ भाग घनी छाया में हो और कुछ भाग उपछाया वाले भाग में होतो आंशिक ग्रहण होता है। यदि चंद्रमा का पूरा या कुछ भाग सिर्फ उपछाया में रहता है तो चंद्रमा की चमक कुछ मंद पड़ जाती है इसे उपछाया चंद्रग्रहण कहते हैं। जैसा कि आज भारत के पूर्वी राज्यों सहित मध्यप्रदेश के 26 पूर्वी जिलों में घटित होने जा रहा है।

सारिका ने बताया कि यह चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना शाम 5 बजकर 34 मिनिट पर समाप्त होगी उसके बाद होशंगाबाद और पश्चिमी जिलों में चंद्रोदय होगा । इसलिये इन भागों में ग्रहण घटित नहीं होगा। यहां चंद्रग्रहण देखने के लिये 8 नवम्बर 2022 का इंतजार करना होगा।  


   

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