समय का बेहतर प्रबंधन एवं योग से चिंता और तनाव को दूर कर सकते हैं : डॉ लता



भारी उद्योग मंत्रालय की इंडिपेंडेंट डायरेक्टर ने दिए मास्टर्स ट्रेनर्स को तनाव से बचने के ट्रिप्स

भोपाल। समय का सही तरह  से नियोजन न करने से तनाव पैदा हो सकता है। जब आपके पास समय कम पड़ रहा हो या आप समय के साथ पिछड़ रहे हों तो शांत और एकाग्र रहना नामुमकिन हो जाता है। पर यदि आप नियोजन के साथ चलेंगे तो आपको परेशान नहीं होना पड़ेगा। अपने समय का बेहतर प्रबंधन करते हुए आप योग के माध्यम से अपने तनाव को काफी कम कर सकते हैं। यह कहना है, भारी उद्योग मंत्रालय की इंडिपेंडेंट डायरेक्टर डॉ आरएच लता का। डॉ लता राजधानी भोपाल में मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य शिक्षा केंद्र, मप्र द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला - शिक्षा का अधिकार, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य " में मास्टर ट्रेनर के वक्ता के रूप में सम्बोधित कर रही थीं। कार्यशाला में शिक्षा विभाग के लगभग 500 से अधिक वरिष्ठ अधिकारी एवं मास्टर्स ट्रेनर्स उपस्थित रहे। 

                     कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए डॉ लता ने कहा कि परीक्षा का समय नजदीक आते ही छात्र-छात्राएं तनाव में आ जाते हैं। उनके मन में एक ही सवाल बार-बार आता है कि परीक्षा में उनके अंक कितने आ पाएंगे लेकिन उन्हें घबराना नहीं चाहिए। विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी तो करें, लेकिन अपनी दिनचर्या के मुताबिक कार्य करें। सुबह में व्यायाम सबसे जरूरी है। योग के जरिए विद्यार्थी तनाव को दूर रख सकते हैं। योग के जरिए विद्यार्थी परीक्षा में बेहतर अंक ला पाएंगे। परीक्षा में तो फायदा मिलेगा ही बल्कि इससे आपकी सेहत में भी सुधार होगा। डॉ लता ने कहा कि परीक्षा के दिनों में अमूमन बच्चे तनाव लेना शुरू कर देते हैं। इससे बचने के लिए उनके लिए योग सबसे ज्यादा फायदेमंद है। वे योग को नियमित दिनचर्या में शामिल कर लें तो बहुत बेहतर रहेगा।

योग मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक :

डॉ आरएच लता ने मास्टर्स ट्रेनर्स एवं छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि योग मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है यदि हम कभी बहुत कठिन अध्ययन या अध्यापन करते हैं और अप्रत्याशित परिणाम नहीं पाते हैं तब हमारा मन चिंता और उदासी में डूब जाता है। योग का निरंतर अभ्यास हमें उदासी से मुक्त करता है। योग हमें सिखाता है कि कैसे हम आत्म संलग्न होकर अच्छा से अच्छा करने की कोशिश कर सकते हैं। यह मानसिक संतुलन बनाए रखता है।



दैनिक चर्या में योग, व्यायाम को शामिल करें :

डॉ लता ने कहा कि योग ही चिंता, तनाव एवं अन्य मनोविकारों को दूर करता है। विद्यालय में छात्रों को अध्यापन के दौरान अनेक प्रकार के तनाव एवं मानसिक उलझनों का सामना करना पड़ता है। यदि शिक्षक अपनी दैनिक चर्या में योग, व्यायाम जैसे ध्यान को सम्मिलित करें तो इस प्रकार के अवांछित तनाव पर नियंत्रण पाया जा सकता है। मानसिक एवं शारीरिक तंत्रों को शांत एवं सहज तरीके से कार्य करना तनाव मुक्त जीवन का आधार है। योग ही एक ऐसा साधन है जिससे शिक्षक तनावों चिंताओं एवं नकारात्मक सोच को दूर कर सकते हैं। शिक्षक व विद्यार्थी योग के जरिए अपने मन को शांत स्वस्थ रख सकते हैं।

योग का विद्यार्थी जीवन में महत्व :

डॉ लता ने कहा कि अनुशासित जीवनशैली शांत वातावरण तथा नियमित योगाभ्यास ध्यान आदि ऐसे कारक हैं जो सभी मानसिक क्षमताओं के लिए लाभकारी होते हैं। विद्यार्थी जीवन में एक बार जो अवसर देखने को मिलती है कि वह कुछ समय तक जो ध्यान केंद्रित करते हैं किंतु अन्य समय में उनके विचार बिखरे होते हैं। उनका मन एक चीज से दूसरी चीजों पर भी भागता रहता है। ऐसे में संयोजन के लिए विद्यार्थी को व्यायाम ध्यान व एकाग्रता से संबंधित ऐसी योगिक क्रियाओं से जोड़ कर रखना चाहिए जिससे कौशल तथा रणनीतियों को सीखने व अभ्यास करने का अवसर मिलता रहे।

कार्यक्रम को स्कूल शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार ने भी सम्बोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों में अच्छे-बुरे की समझ के साथ अपराध के प्रतिकार करने की क्षमता विकसित करने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसमें समाज को भी मदद करनी होगी। तभी हम बच्चों को सही ढंग से शिक्षित कर पाएंगे। कार्यशाला में बाल आयोग के  सदस्य बृजेश चौहान, महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक विशाल नाडकर्णी, राज्य शिक्षा केंद्र के समन्यवक आशीष भारतीय, बाल आयोग की सचिव शुभा वर्मा सहित प्रदेश के 52 जिलों से सभी सीएसी, बीआरसी, एपीसी और जनशिक्षक सहित 550 प्रतिभागी उपस्थित रहें।




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