राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के लिए तैयार, 25 फीट दूर से दर्शन



श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने वाले 16 गुण झलकेंगे
शिल्पकार सोमपुरा बोले-5.5 फीट की तीन मूर्तियां बना रहे  

अयोध्या । अयोध्या में भगवान श्रीराम की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा में एक महीना बाकी है। इसके बाद भी देश की जनता का उत्साह बढता जा रहा है। श्रीराम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के लिए तैयार है। गर्भगृह में वो आसन भी आकार ले चुका है, जहां रामलला विराजेंगे। शिल्पकार 5.5 फीट की तीन मूर्तियां बना रहे हैं। एक श्याम रंग की, दूसरी गहरे काले शालिग्राम पत्थर की और तीसरी सफेद पत्थर की। मंदिर ट्रस्ट 29 दिसंबर को इनमें से एक मूर्ति तय करेगा। उसी की प्राण-प्रतिष्ठा होगी। अयोध्या के श्रीराम मंदिर की पूरी डिजाइन तैयार करने वाले चंद्रकांत सोमपुरा ने बताया​ कि गर्भगृह से बाहर निकलते ही सामने गणपति और हनुमानजी की मूर्ति स्थापित होगी। मंदिर के सामने गरुड़जी की मूर्ति लगाई जा रही है। प्राण-प्रतिष्ठा मंदिर की दूसरी मंजिल पर होगी। यहीं राम दरबार भी बनाया गया है। यहां भगवान श्रीराम, मां जानकी, लक्ष्मणजी और हनुमानजी की मूर्ति होगी।

नागर शैली में अयोध्या मंदिर  

चंद्रकांत सोमपुरा ने बताया कि भारत में मंदिर डिजाइन करने की 16 शैलियां हैं। इनमें 3 प्रमुख हैं। उत्तर भारत में नागर शैली, दक्षिण में द्रविड़ और मध्य-पूर्व भारत में पैगोडा शैली। अयोध्या मंदिर नागर शैली में है। सोमनाथ, स्वामीनारायण, अंबाजी मंदिर इसी शैली में बने हैं। आठ दिशाएं, अष्ट भुजाएं और विष्णु के आठ स्वरूपों को ध्यान में रखकर गर्भगृह अष्टकोण बनाया है। नक्काशी में भगवान श्रीराम के वो 16 गुण नजर आएंगे, जिनकी बदौलत वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। गर्भगृह इस तरह बनाया है कि भक्तों को 25 फीट दूर से रामलला के दर्शन हों। 

हर पिलर में16-16 मूर्तियां उकेरी 

मंदिर पूरी तरह तैयार होने में 1 साल और लगेगा। अयोध्या कॉरिडोर बनने में भी डेढ़ से 2 साल लगेंगे। मंदिर में विष्णु के दशावतार, 64 योगिनी, 52 शक्तिपीठ और सूर्य के 12 स्वरूप की मूर्तियां भी उकेरी गई हैं। हर पिलर में लगभग 16-16 मूर्तियां उकेरी गई हैं। मंदिर में ऐसे कुल 250 पिलर हैं।

34 साल पहले मंदिर निर्माण की शुरुआत 

अयोध्या आंदोलन के वक्त मंदिर निर्माण की शुरुआत हो गई थी। चंद्रकांत सोमपुरा ने कहा, मंदिर निर्माण की शुरुआत 34 साल पहले 1989 में ही कर दी थी। तब अयोध्या आंदोलन शुरू ही हुआ था। डीडी बिरलाजी ने मुझे कहा कि तुम अशोक सिंघल के साथ अयोध्या जाओ और जिस जगह मंदिर बनना है, उसका नाप लेकर आओ। वहां कोर्ट के प्रतिबंध के कारण गवर्नमेंट टेप (मापपट्‌टी) का उपयोग नहीं कर सके, इसलिए कदम से नाप की। कुल 82 कदम में जगह तय की।

कदमों के माप से ही डिजाइन फाइनल की

कुछ सालों बाद मैप तैयार हुआ और कदमों के माप से ही डिजाइन फाइनल की। प्रयागराज कुंभ में संतों की मंजूरी से लकड़ी का मॉडल बनाया, जो बरसों राम मंदिर का प्रतीक रहा। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसमें कई परिवर्तन हुए। ऊंचाई भी 128 से बढ़ाकर 161 फीट की। मंदिर निर्माण शुरू किया, तब बजट 400 करोड़ था। अब मंदिर और कॉरिडोर पर 2 हजार करोड़ रु. खर्च होंगे।
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