सांसदों के इस्तीफे के बाद सियासत में ऊबाल


शिवराज पहुंचे छिंदवाड़ा, जा सकते हैं आएसएस मुख्यालय 

भोपाल। विधानसभा चुनाव में एतिहासिक जीत के बाद विधायक का चुनाव लड़कर जीते ब्रिगेड के कद्दावर नेताओं के इस्तीफे से सियासत में फिर ऊबाल आ गया है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 21 सांसदों को मैदान में उतारा था। इनमें से 12 सांसद चुनाव जीते जबकि 9 हार गए। जीते हुए 12 सांसदों में से 11 ने बुधवार को लोकसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। सिर्फ राजस्थान से चुनाव जीतने वाले बालकनाथ ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। संसद सदस्यता छोडऩे वालों में मध्यप्रदेश से नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल, राकेश सिंह, उदय प्रताप और रीति पाठक हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ से अरुण साव, रेणुका सिंह और गोमती साय जबकि राजस्थान से राज्यवर्धन सिंह राठौड़, दीया कुमारी और किरोड़ी लाल मीणा शामिल हैं। तेलंगाना में विधानसभा चुनाव जीते कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने भी संसद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वे कल तेलंगाना मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। लेकिन मध्यप्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा सीएम पद के दावेदारों की वजह से संस्पेंस और ज्यादा गहराता जा रहा है।  
सियासी गलियारों में सीएम पद को लेकर जो चर्चा हैं उनमें प्रह्लाद सिंह पटेल का नाम सबसे ऊपर है। पटेल के साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर, सांसद वीडी शर्मा, राकेश सिंह का नाम भी प्रमुखता से चल रहा है। उधर, चुनाव में सागर की रेहली सीट से दसवीं बार अजय होकर लोटे गोपाल भार्गव ने दिल्ली दरबार में दस्तक देकर सबको चौंका दिया है। माना जा रहा है वे भी इस मुकाबले में सफर कर रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच कार्यवाहक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छिंदवाड़ा पहुंचकर सबको चौंका दिया है। शिवराज के ऑफीशियल प्रोग्राम में छिंदवाड़ा जाना भाजपा को मिली हार की समीक्षा को दर्शा रहा है। लेकिन सियासी गलियारों में चर्चा है कि शिवराज छिंदवाड़ा से आरएसएस मुख्यालय जा सकते हैं। शिवराज के इस एक्शन ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। क्योंकि पूर्व में भी जब राजनीतिक गलियारों में शिवराज को सीएम पद से हटाने की चर्चा होने लगी थी। तब शिवराज अपनी सुसराल (गोंदिया) पहुंचकर फिर चौंका दिया था। इसके बाद सीएम पद से उन्हें हटाने की सारी अटकलों को विराम लग गया था। कुछ ऐसा ही इस बार भी देखने को मिल रहा है। 

 14 दिन में छोडऩी होती है एक सीट

दोहरी सदस्यता : कोई व्यक्ति संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा-का सदस्य नहीं हो सकता है। रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट (1951) के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति संसद के दोनों सदनों में चुना गया है तो उसे 10 दिन के अंदर ये बताना होगा कि वह किस सदन का सदस्य रहना चाहता है। अगर वह समय रहते इसकी जानकारी नहीं देता है, तो राज्यसभा में उसकी सीट अपने आप खाली हो जाएगी। अगर किसी सदन का सदस्य दूसरे सदन के लिए भी चुन लिया जाता है, तो पहले सदन में उसकी सीट खाली हो जाएगी। अगर कोई व्यक्ति किसी सदन में दो सीटों पर चुना गया है, तो उसे एक सीट चुननी होगी। वर्ना उसकी दोनों सीटें खाली हो जाएंगीं।

 '29 कमलों की माला प्रधानमंत्री को समर्पित करेंगे':

 सीएम शिवराज ने लिया एक और संकल्प, कहा '29 कमलों की माला प्रधानमंत्री को समर्पित करेंगे' मध्यप्रदेश में भाजपा ने प्रचंड जीत का दावा किया और इस दावे को असलियत में बदलकर भी दिखाया। अब मिशन एमपी सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने एक और संकल्प लिया है। ये संकल्प है अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में मध्यप्रदेश से सभी 29 सीटें जीतने का। उन्होने कहा कि अगले साल होने वाले चुनाव में वो एमपी से '29 कमलों' की माला प्रधानमंत्री को समर्पित करने के लिए कृत संकल्पित हैं। लोकसभा चुनाव के लिए संकल्प: इस साल शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश की जनता से 'कमल दिवाली' मनाने का आह्वान किया था। दीपावली के पांच दिन बाद प्रदेश में मतदान था और मुख्यमंत्री ने कमल दिवाली मनाने के लिए जनता से साथ मांगा था। ये साथ उन्हें भरपूर मिला और भाजपा ने बंपर जीत हासिल की है। और इसी के साथ अब सीएम ने एक और संकल्प की घोषणा कर दी है। शिवराज सिंह चौहान ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ङ्ग पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि 'एक और संकल्प संकल्प 29 कमल के फूलों की माला का। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। लेकिन इस प्रचंड जीत के बाद एक और संकल्प अभी बाकी है, हमारा संकल्प अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 29 सीटों पर 'कमल' खिलाना है। इसके लिए हम सभी भाजपा के समर्पित व निष्ठावान कार्यकर्ता आगे भी पूरे समर्पण के साथ कड़ा परिश्रम कर संगठन को और अधिक मजबूत बनाते हुए निश्चय ही '29 कमलों' की माला को हमारे प्रधानमंत्री को समर्पित करेंगे।' बता दें कि एमपी की 29 में से 28 सीटें फिलहाल भाजपा के पास है और छिंदवाड़ा से सिर्फ नकुलनाथ ही मध्य प्रदेश से एकमात्र लोकसभा सांसद हैं। 

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