बजट गुलामी का प्रतीक तो फिर पेश क्यों किया जाता है : ओझा


भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा कल पेश किये गये केन्द्रीय बजट जिसे कि वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन ने बजट की जगह 'बहीखाता' बताते हुए जारी किया और जिस प्रकार भाजपा के नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बजट शब्द को गुलामी की मानसिकता का प्रतीक बताया है, यह अपने आप में हास्यास्पद है। यदि बजट शब्द से भाजपा को इतनी ही नफरत थी, तो अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार और पिछली मोदी सरकार, क्यों गुलामी की मानसिकता से 'बजट' प्रस्तुत करती रहीं और भाजपा की तमाम राज्य सरकारें जिसमें शिवराज सिंह की पिछली मध्यप्रदेश सरकार भी शामिल है, वह क्यों पिछले 15 वर्षों तक बजट पेश करती रही। श्रीमती ओझा ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि भाजपा और उसके नेता बजट शब्द से इतने ही व्यथित थे तो क्यों प्रधानमंत्री मोदी ने उसी बहीखाते को बार-बार अपनी प्रतिक्रिया में 'बजट' संबोधित किया। यदि यह बजट नहीं बहीखाता भी है तो भी इसमें आय और व्यय दोनों का ही विवरण प्रस्तुत करना चाहिए था। जबकि पूरे बजट में केवल व्यय का ही वर्णन नजर आता है आय के स्त्रोतों का कहीं कोई वर्णन नहीं है। श्रीमती ओझा ने कहा कि वर्तमान बहीखाते की तरह ही मोदी सरकार के पिछले जितने भी बजट थे, उन सब में जनता के हित और सामान्य विवेक का अभाव था। यही नहीं बजट के अलावा भी नोटबंदी जैसे तुगलकी निर्णय लेकर जिस कैश-लेस इंडिया की परिकल्पना देश के सामने प्रस्तुत की गई थी, वह भी खोखली निकली, उल्टा देश की अर्थव्यवस्था में नकदी का चलन और बढ़ा, जिससे भ्रष्टाचार और अपराधों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई और इस तथ्य को केन्द्रीय वित्तमंत्री  निर्मला सीतारमन ने भी अभी पिछले दिनों, संसद के सम्मुख स्वीकार कर लिया है। ओझा ने कहा कि देश की जनता अब जुमलों से ऊब चुकी है और उसे बजट हो या बहीखाता, शब्दों से कोई मतलब नहीं है, वह वास्तव में अपने लिए सुविधाएं चाहती है, रोजगार चाहती है, विकास चाहती है, पर दुर्भाग्य है कि इन मुद्दों पर जनता को राहत देने के लिए इस बजट में कोई ठोस कार्ययोजना तो दूर, कोई प्रकाश तक नही डाला गया है।श्रीमती ओझा ने कहा कि गुलामी और राष्ट्रवाद की परिभाषा हमें उन शिवराज सिंह चौहान से नहीं सीखनी है, जिनके स्वर्गीय नेता और जनसंघ के पितृ पुरूष डाॅ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी, आजादी के पहले ही मुस्लिम लीग के साथ मिलकर फजलुल हक कि बंगाल सरकार में वित्तमंत्री रहते हुए बजट प्रस्तुत करते रहे। ज्ञात रहे कि ये वही फजलुल हक थे जो बाद में अविभाजित पाकिस्तान के गृहमंत्री बने।


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