देश को आर्थिक बदहाली की कगार पर पहुंचा दिया : अभय

मोदी सरकार का आर्थिक सर्वेक्षण-संकट में अर्थतंत्र



भोपाल । मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया उपाध्यक्ष अभय दुबे ने बताया है कि केंद्र की भाजपा सरकार का आज पेश किया गया आर्थिक सर्वेक्षण से यह सिद्ध होता है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने देश को बीते पांच वर्षों में आर्थिक बदहाली की कगार पर ला खड़ा किया है। यह आर्थिक सर्वेक्षण अर्थव्यवस्था के लिये निराशावाद का प्रतीक है। दुबे ने कहा कि आज प्रस्तुत किये गये आर्थिक सर्वेक्षण में देश में बढ़ रही भीषणतम बेरोजगारी से लड़ने का कोई प्रशस्त मार्ग नहीं दिखाई पड़ता है। भारत में 45 वर्षों में बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत होकर सर्वाधिक स्तर पर है। केंद्र की भाजपा सरकार ने चुनाव के पहले न सिर्फ एनएसएसओ की इस रिपोर्ट को दबा दिया था, बल्कि मीडिया में इसके जारी होने पर इसको स्वीकार भी नहीं किया था, मगर अंततः नई सरकार के गठन के बाद यह चैंकाने वाली रिपोर्ट जारी करना पड़ी। इतना ही नहीं सेंटर फार माॅनिटरिंग इंडियन एकोनाॅमी की रिपोर्ट बताती है कि 25 जून 19 तक भारत की बेरोजगारी की दर 8.1 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। भारत का वर्क फोर्स 4.7 करोड़ से घट गया और साथ ही 3.7 करोड़ अनियमित मजदूर, जिनमें से तीन करोड़ कृषि मजदूर हैं, उन्होंने अपनी नौकरियां गवां दी हैं।


जीडीपी ग्रोथ में गड़बड़ी


आर्थिक सर्वेक्षण 2020 में 7 प्रतिशत विकास दर का आंकलन करता है। मगर आर्थिक सर्वेक्षण में इसके बरकरार रहने की कोई बुनियाद नहीं बतायी गई है। इतना ही नहीं सेक्टर वाईस ग्रोथ प्रोजेक्शन्स भी नहीं दिये गये हैं।
वर्तमान में विकास दर 5 वर्ष के निम्न स्तर पर है। वर्ष 2018-19 के चारों क्वार्टर में विकास दर लगातार गिर रही है। क्रमशः 8.0, 7.0, 6.6 और 5.8 प्रतिशत है। संभवतः 2019 के पहले क्वार्टर अर्थात अप्रैल से जून में इसके और नीचे जाने की संभावना है। देश का आॅटो मोबाईल सेक्टर पिछले 10 माह से बेहद गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। रशलेन डेली आॅटो न्यूज सर्विसेस के अनुसार देश की बड़ी आॅटो मोबाईल कंपनियां जैसे मारूती, टाटा, होंडा, महेन्द्रा आदि की 35 हजार करोड़ रूपयो की कारें पिछले सात महीने से बगैर बिके कारखानों में खड़ी हैं और कई कंपनियों के टू-व्हीलर लगभग 17 हजार करोड़ रूपये के इतनी ही अवधि में बिक नहीं पा रहे हैं। मारूती सुजूकी, होंडा कार सिंडिया, टाटा मोटर्स, रिनाल्ड निसान, होंडा मोटर साईकिल एंड स्कूटर इंडिया ने बड़ी संख्या में अपने प्लांट कई-कई दिनों के लिए बंद रखे हैं। दाॅ कंपोजिट इंडेक्स आॅफ फैक्ट्री इन सर्विसेस के अनुसार सर्विस सेक्टर पिछले तेरह महीने में पहली बार सिकुड़ रहा है।


नया इन्वेस्टमेंट निचले स्तर पर


आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि प्रायवेट इन्वेस्टमेंट प्रमुख कारक है ग्रोथ, जाॅब, एक्सपोर्ट और डिमांड का। जबकि सच्चाई यह है कि नया निवेश अपने 15 साल के निचले स्तर पर है। नये पब्लिक सेक्टर प्रोजेक्ट्स 41 प्रतिशत से नीचे गिर गये हैं, और ये 14 साल में सबसे निचले स्तर पर है। प्रायवेट सेक्टर प्रोजेक्ट्स 26 प्रतिशत की दर से ठप्प पड़े हैं जो अब की सर्वाधिक दर है।


एक्सपोर्ट भी नीचे आया


एक्सपोर्ट की ग्रोथ यूपीए सरकार की तुलना में 15 गुना से नीचे आ गई है। यूपीए के दौरान 393 प्रतिशत थी जो भाजपा सरकार में 26 प्रतिशत है।


मेक इन इंडिया बना जुमला


भाजपा सरकार का मेक इन इंडिया अब तक एक जुमला ही साबित हुआ है। जीडीपी में मैन्युफेक्चरिंग का हिस्सा भाजपा सरकार में पिछले पांच सालों में सिर्फ 0.5 प्रतिशत बढ़ा है।
स्माल मीडियम फाॅर माईक्रो उद्योग नोट बंदी के सदमे से अब तक नहीं उबर पाये हैं। मुद्रा लोन का एनपीए 2019 में 126 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जीएसटी कलेक्शन की ग्रोथ मई 2019 में 6 प्रतिशत थी जो जून 2019 में 4.5 प्रतिशत तक गिर गयी। इसका अर्थ साफ है कि कंज्यूमर स्पेंडिंग गिर रही है।


संकट में देश की खेती


एग्रीकल्चर ग्रोथ रेट में मात्र 2.9 प्रतिशत की दर से वृद्धि 2018-19 में देखी गई। एग्रीकल्चर वेजेस में मात्र 4.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। देश में रोज 35 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। कमजोर मानसून फिर खेती के लिए संकट साबित हो सकता है।


फायनेंशल सर्विंस सेक्टर


केंद्र की भाजपा सरकार वित्तीय संस्थाओं को संरक्षित रखने में नाकामयाब हुई है। बैंकों और एनबीएफसी (नाॅन बैंकिंग फायनेंशल कंपनी) में लिक्विडिटी का संकट दिखाई देता है। जिससे एमएसएमई सेक्टर प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगा। एनबीएफसी में क्रेडिट संकुचन (क्रेडिट कांट्रेक्शन) 31 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जो कि सीधा-सीधा आॅटो मोबाईल, कृषि और एमएसएमई को प्रभावित करेगा।
इसी प्रकार प्रापर्टी से संबंधित लोन 50 से 80 प्रतिशत तक कम हुये हैं। कृषि लोन 55 प्रतिशत से घटा है। एज्युकेशन और हाउसिंग लोन 42 और 23 प्रतिशत से घटा है। यह धीमी अर्थव्यवस्था के साफ संकेत हैं। देश की भाजपा सरकार ने भारत को बहुत बड़े आर्थिक संकट में फसा दिया है।


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