मंत्री, मुख्यमंत्री या नौकरशाह, कोई बड़ा नहीं : सिंधिया


पूर्व केंद्रीय मंत्री का दो टूक, टीम भावना से काम करें, तभी चलेगी सरकार


भोपाल । पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दो टूक कहा है कि न मंत्री ऊपर न ब्यूरोक्रेसी ऊपर न ही मुख्यमंत्री ऊपर सबको टीम भावना से काम करना ही होगा तभी सरकार सफल होगी। सिंधिया गुरुवार को विधानसभा परिसर के मानसरोवर हाल में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। लोकसभा चुनाव बाद मीडिया से मुखातिब हुए सिंधिया के तेवर आज अलग अंदाज में दिखाई दिए। दरअसल जब उनसे सिंधिया समर्थक मंत्रियो पर ब्यूरोक्रेसी हावी होने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने यह बात कही। कांग्रेस में गुटबाजी के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार में कोई बंटवारा और टकराव नहीं है। सभी मंत्री विधायक और मुख्यमंत्री भी अपनी जवाबदेही समझते हैं। आने वाले समय में कर्नाटक और गोवा की तरह मध्यप्रदेश में हालात पैदा होने के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि भाजपा मध्यप्रदेश में सत्ता हासिल करने और मुंगेरीलाल के सपने देखना छोड़ दे। सरकार में पीछे के दरवाजे से घुसने के सपने देखना बंद करे। कांग्रेस में सभी विधायक अपनी जवाबदारी समझते हैं। कांग्रेस मजबूत है और सरकार पूरे पांच साल चलेगी।


अब इंतिजार का समय नहीं, नए अध्‍यक्ष का निर्णय जल्‍द ले पार्टी 

पूर्व केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर गहराए संकट पर चिंता जताई है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अब इंतिजार का न समय है न हालात । उन्होंने कहा कि सात सप्ताह हो चुके हैं लेकिन अध्यक्ष नहीं है। ऐसी स्थिति कांग्रेस संगठन में कभी नहीं दिखी। सिंधिया ने कहा कि पार्टी में अध्यक्ष के रूप में ऐसी शख्सियत को मौका दिया जाना चाहिए जो कांग्रेस में नई ऊर्जा पैदा कर सके। पार्टी का नया अध्यक्ष कौन होगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी संयुक्त रूप से निर्णय लेती है। मेरा कहना है कि निर्णय जल्द हो। नए अध्यक्ष का निर्णय जल्दी और संयुक्त रूप से होना चाहिए।

मेरी दौड़ कुर्सी के लिए नहीं


कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने के सवाल पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि मेरी दौड़ सत्ता और कुर्सी के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा के लिए है। मेरा जनता से जुड़ाव है, कुर्सी और सत्ता से कोई जुड़ाव नहीं है।


जिन्होंने राज्य को डुबोया, वही सवाल उठा रहे


सिंधिया ने मध्यप्रदेश में विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन्होंने 15 साल मध्यप्रदेश में कुशासन कर राज्य को पिछड़ेपन के कगार में खड़ा कर दिया और जमकर भ्रष्टाचार किया आज वही सदन में अग्रेसिव होने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि हम राज्य को विकसित श्रेणी की ओर ले जा रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमने 17 बजट देखे हैं पर पर यह पहला बजट जिसमे आंकड़े गायब हैं। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आज जो हो रहा है, उसकी कल्पना नहीं की है।


जरूरत पर अपनी सरकार से लड़ेंगे 


पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हम जिन वादों को लेकर जनता के पास गए थे, यदि उसके पूरा होने में कहीं कोई कमी नजर आई तो मैं अपनी ही सरकार से भी लडूंगा।


मैं बैकफुट पर नहीं, फ्रंटफुट पर खेलता हूं


एक सवाल के उत्तर में सिंधिया ने कहा कि मैं कभी बैकफुट पर नहीं खेलता, मैं हमेशा फ्रंटफुट पर बैटिंग करता हूं। खुद के चुनाव हारने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं हम में भी कमी रही होगी। हमे फिर से जनता का विश्वास जितना होगा। उन्होंने कहा कि नैतिकता यही है कि हम सबको अपनी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।


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