सहकारिता के सरगना पर मेहरबानी बरकरार


भ्रष्टाचार के बादशाह बने नीखरा के करतूतों पर पर्दा, सीएम से पीएम तक बेबस


भोपाल। बिन सहकार नहीं उद्धार की मूल भावना के साथ प्रदेश में व्यापक रुप से शुरु किये गये सहकारिता आंदोलन को कुछ सालों से विभागीय अफसरों और राजनेताओं ने ऐसा चारागाह बनाया कि उसके मायने ही बदल गये हैं। मध्यप्रदेश में सहकारिता की रीढ़ टूट सी गई है। दरअसल इसके पीछे इसके क्रियान्वयन का मुख्य रुप से जिम्मा संभालने वाले मप्र राज्य सहकारी बैंक मर्यादित भोपाल (अपेक्स बैंक) में पदस्थ अफसरों एवं सहकारिता विभाग के अफसरों के भ्रष्टाचारी जुगलबंदी है। अपेक्स बैंक में प्रबंध संचालक का जिम्मा संभालने वाले अफसरों ने इसमें भ्रष्टाचार की ऐसी इमारत खड़ी की कि इससे उबारने में सदियों लगेंगे। अपेक्स बैंक के वर्तमान प्रभारी प्रबंध संचालक प्रदीप नीखरा के  कारनामें भी कुछ इसी तरह है। बड़ी बात यह है कि पूर्व में भाजपा सरकार ने जिस प्रदीप नीखरा को पीएमओं में शिकायत के बाद हटाया था, कांगे्रस सरकार आने के बाद उसी भ्रष्टाचारी नीखरा को फिर से प्रभारी प्रबंध संचालक बना दिया गया है। अब सरकार बदलने पर एक बार फिर उनकी विदाई की तैयारी शुरु हो गई है। सहकारिता में सुधार करने के लिये ही सरकार ने विभाग के आयुक्त अग्रवाल को रवाना कर दिया है। अब बारी अपेक्स बैंक की है।  
भ्रष्टाचार की लंबी है फेहरिस्त: 
अपेक्स बैंक के वर्तमान प्रभारी प्रबंध संचालक प्रदीप नीखरा के कारनामों की लंबी फेहरिस्त है। अपेक्स बैंक के पूर्व लेखाधिकारी एचएस मिश्रा ने सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव, राज्य के मुख्य सचिव, पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भेजी शिकायत में उल्लेख किया  है कि  जिला बैंक रीवा की शाखा डभौरा में हुए 25 करोड़ के घपले में पंकज गुप्ता और आरपी हजारी के द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद भी नीखरा द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई । उस मामले में आरोपी रामकृष्ण मिश्रा और उरमालिया द्वारा बताया गया था कि घपले की राशि में से कुछ राशि प्रदीप निखरा को दी गई है। इसी प्रकार अपेक्स बैंक में नीखरा ने एक्सग्रेसिया के रूप में अपने कार्यकाल में करीब 50 करोड़ रुपए का भुगतान अवैध रूप से किया, जबकि धारा 43 सहकारी विधान में लाभ के विनियोजन के संबंध में यह प्रावधान है कि बोनस संदाय अधिनियम 1965 के अनुसार बोनस दिया जा सकता है किंतु एक्सग्रेसिया दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है। क्योंकि बोनस उसी कर्मचारी को मिलता है जिसका वेतन अधिकतम 10 हजार प्रतिमाह हो किंतु नीखरा ने 50 हजार से लेकर लाखों रुपए तक के वेतन वालों को एक्सग्रेसिया के रूप में अवैध रूप से राशि वितरित कर बैंक को करोड़ों की चपत लगाई।
सहकारी अधिनियम की धारा 55(1) का उल्लंघन: 
यह कि पंजीयक जिसे सहकारी अधिनियम की धारा 55(1) के तहत सेवा नियम बनाने या संशोधन करने का अधिकार प्राप्त है, ने 1 नवंबर 2019 को धारा 55(1) के तहत आदेश पारित कर अपेक्स बैंक के सेवा नियमों में संशोधन किया जाकर बैंक के समस्त ग्रेड के विशिष्ट संवर्ग के अधिकारियों के स्थानांतरण करने या उनके निलंबित करने या उनके विरुद्ध कोई भी कार्रवाई करने अथवा उनको दंडित करने की एकमात्र अधिकारिता बैंक की संवर्ग कमेटी को प्रदत्त कर दी थी। जबकि 1 नवंबर 2019 से प्रभारी प्रबंध संचालक को अधिकारियों के संबंध में कोई भी कार्रवाई करने की अधिकारिता नहीं रखी थी । इसके बाद भी प्रदीप नीखरा ने एक नहीं अनेकों संवर्ग अधिकारियों के विरुद्ध 1 नवंबर 2019 के बाद अधिकारिताविहीन रूप से कार्रवाई कर गंभीरतम अवैध कृत्य किया है । 
नियम विरुद्ध दी संविदा नियुक्ति:
किसी भी कर्मचारी को जिसकी आयु 62 वर्ष हो गई हो उसको पुनर्नियुक्ति,  संविदा नियुक्ति या सेवा वृद्धि दिए जाने का कोई प्रावधान नहीं है । किंतु नीखरा ने अपने भ्रष्ट साथी प्रदीप जोशी संवर्ग अधिकारी को जो कि 62 वर्ष की आयु पूर्ण होने के कारण 31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त हो रहे थे, को छह माह की सेवा वृद्धि देने का आदेश 31 मार्च 2020 को जारी कर दिया । जबकि नवंबर 2019 से 8 अप्रैल 2020 तक प्रशासक कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई और प्रशासक कमेटी द्वारा कोई निर्णय नहीं लिया गया था।  यही कारण है कि श्री नीखरा ने 19 मार्च 2020 को जोशी का सेवानिवृत्त आदेश जारी किया गया इसके बावजूद नीखरा एवं पंजीयक एमके अग्रवाल ने मिलीभगत कर पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से जोशी को सेवा वृद्धि  देने की कार्रवाई  की जो एक गंभीर अपराध है। 


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