सबकुछ भगवान भरोसे है, इंतजाम के नाम पर तो बकवास है: उमेश तिवारी


जिला चिकित्सालय में कोरोना की निगरानी नही, मनमानी है

 

सीधी। टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कोरोना वायरस से संक्रमण के फैलाव में नियंत्रण करने में विफल हो रहे सरकारी तंत्र पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों को स्वतः चौकस रहते हुए अपने को सुरक्षित करने का आग्रह किया है। श्री तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही ताली-थाली, घरी-घंट बजवाकर, दिया-बाती जलवाकर देशवासियों को कोरोना से लड़ने के औजार से लैस कर इसारों में बता दिया था कि कोरोना से जंग में भारतीयों को तंत्र-मंत्र-तावीज, ओझा-गुनियाँ-चौरा, टोनें-टोटके और भगवान भरोसे रहना पड़ेगा। प्रधानमंत्री ही है उन्हें अंदर की बात जानकारी में है कोरोना से मुकाबले को जैसी स्वस्थ सुबिधा होनी चाहिए वह हमारे पास है नही। उन्हें ज्ञात था कि हर रोज़ कोरोना मरीज़ों की संख्या बढ़ेगी और उसी के साथ बेड की उपलब्धता घटेगी। टेस्ट होगे मरीज बढेंगे उन्हें बेड और डॉक्टर दोनों की ज़रूरत पड़ेगी लेकिन गांवों में अस्पताल है नहीं सहरो में ना तो जरूरत भर को बेड हैं और ना ही डॉक्टर, बुनियादी चीजें मास्क और सैनिटाइजर उपलब्ध करने होंगे, कोविड अस्पताल शुरू करने होंगे, कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर आदि की व्यवस्था भी करनी होगी, जरूरी उपकरण भी नही है जो जरूरी है। देश में कोरोना पीड़ितों की तादाद बतारही है कि सरकारें कोरोना संक्रमण से प्रभावितों को समुचित इलाज और इंतजाम देने में कारगर साबित नहीं हो सकी है। हाँ कोरोना से प्रभावित हुए प्रभावसाली भर्ती आइसोलेशन बेड से मीटिंग बैठक इंज्वाय कर रहे है। जो बेहद सामान्य लोग हैं उनकी स्थिति सोचनीय है जो किसी बड़े ओहदे वाले आदमी को नहीं जानते, उन लोगों के साथ क्या कुछ हो रहा होगा?

 

अस्पताल में कोरोना की निगरानी नहीं मनमानी हो रही: 

 

श्री तिवारी ने कहा कि देश के अधिकांश इलाकों में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है। सीधी जिले में भी कोरोना का संक्रमण तेजी से अपने पैर पसार रहा है। जिले में दिनोंदिन बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले बताते हैं कि यहां हालात संगीन होने वाले हैं, लेकिन कोरोना से निपटने में स्वस्थ विभाग की तैयारियां नाकाफी नजर आ रही हैं। जनप्रतिनिधियों के निकम्मेपन के चलते जिला चिकित्सालय सीधी लंबे वक्त से समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन कोरोना वायरस ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। पर्याप्त आइसोलेशन बेड व सुरक्षा उपाय तो दूर कोरोना वायरस के जांच सेम्पल देने वाले लोगों को जांच रिपोर्ट तक न देकर अस्पताल के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों द्वारा कहा जाता है कि पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर बताया जाएगा अन्यथा मान लेना कि आपकी रिपोर्ट निगेटिव है, यह जवाब हास्यस्पद, चिन्ताजनज तथा शर्मनाक है। निगेटिव पांजटिव रिपोर्ट के चक्कर मे लोग कई दिनों तक मानसिक दहसत में रहने को मजबूर हो रहे है। जिला अस्पताल में जिम्मेदारों द्वारा निगरानी के बजाय मनमानी की जा रही है। जिलेवासी भगवान भरोसे है, इंतजाम के नाम पर सिर्फ बकवास है। ऐसे इंतजाम का क्या फायदा जहां जांच तक जिम्मेदारी पूर्वक नही की जा रही है? क्या हम सभी अच्छे इलाज के हक़दार नही हैं और गरिमापूर्ण मौत के हकदार भी नही है? 

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