प्रचार खत्म, अब मतदाता की बारी, मतदान आज


ऐतिहासिक उपचुनाव में दांव पर कांग्रेस-बीजेपी की साख, 10 नवबंर को परिणाम 


भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा की 28 सीटों पर हो रहे उपचुनाव का प्रचार रविवार को थम गया। 3 नवंबर को इन सीटों पर मतदान होना है। प्रदेश के इन उपचुनाव में 12 मंत्रियों सहित कुल 355 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं। दो दर्जन से अधिक सीटों पर हो रहे इन उपचुनाव में अधिकांश सीटों पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस एवं बीजेपी के बीच माना जा रहा है लेकिन कुछ सीटों पर मायावती के नेतृत्व वाली बसपा एवं कुछ अन्य छोटे राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में हैं। मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार इतनी ज्यादा विधानसभा सीटों पर एक साथ उपचुनाव हो रहे हैं। यही उपचुनाव तय करेंगे कि 10 नवबंर को इनके परिणाम आने के बाद कौन सी पार्टी प्रदेश में सत्ता में रहेगी। इन चुनाव में सत्तारूढ़ बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस, दोनों की साख दांव पर लगी है। उपचुनाव वाली 28 सीटों में से 25 सीटें कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देकर बीजेपी में आने से खाली हुई हैं, जबकि दो सीटें कांग्रेस के विधायकों के निधन से और एक सीट बीजेपी विधायक के निधन से खाली हुई है। मध्यप्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में से वर्तमान में बीजेपी के 107 विधायक हैं, जबकि काग्रेस के 87, चार निर्दलीय, दो बसपा एवं एक सपा का विधायक है। बाकी 29 सीटें रिक्त हैं, जिनमें से दमोह विधानसभा को छोड़कर 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। दमोह सीट पर उपचुनाव की तिथि घोषित होने के बाद कांग्रेस विधायक राहुल सिंह लोधी ने विधायकी एवं कांग्रेस से इस्तीफा दिया है और बीजेपी में शामिल हुए हैं। इन उपचुनाव के बाद सदन में विधायकों की संख्या वर्तमान 202 से बढ़कर 229 हो जाएगी। इसलिए बीजेपी को बहुमत के 115 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए इस उपचुनाव में मात्र आठ सीटों को जीतने की जरूरत है, जबकि कांग्रेस को पूरी 28 सीटें जीतनी होंगी।

बीजेपी का दांव कांग्रेस से आये 25 विधायकों पर :


बीजेपी ने उन सभी 25 लोगों को अपना प्रत्याशी बनाया है, जो कांग्रेस विधायकी पद से इस्तीफा देर बीजेपी में शामिल हुए हैं। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन प्रदेश की सत्तारूढ़ बीजेपी, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एवं बसपा के आला नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टी के लिए वोट मांगने के लिए आज और उग्र चुनाव प्रचार किया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर एवं प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने बीजेपी प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे, जबकि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट एवं अन्य पार्टी नेताओं ने कांग्रेस के उम्मीदवारों को जिताने की लोगों से अपील की।

छाया रहा ‘आइटम’, ‘माफिया और मिलावट खोर’:

इस चुनाव प्रचार के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने एक रैली में प्रदेश की मंत्री एवं बीजेपी उम्मीदवार इमरती देवी को ‘आइटम’ कहने के साथ-साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ ‘माफिया और मिलावट खोर’ शब्दों का इस्तेमाल भी किया था। इस पर चुनाव आयोग ने प्रचार के दौरान आदर्श आचार संहिता का बार-बार उल्लंघन को लेकर कमलनाथ का ‘स्टार प्रचारक’ का दर्जा शुक्रवार को रद्द भी किया था। इस चुनाव प्रचार में ‘टिकाऊ-बिकाऊ ’का मुद्दा छाये रहने के साथ-साथ किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा भी खूब उछाला गया। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के 22 विधायकों के त्यागपत्र देकर बीजेपी में शामिल होने के कारण प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी, जिसके कारण कमलनाथ ने 20 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। फिर 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्य प्रदेश में बीजेपी सरकार बनी।


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