देश के बाल संरक्षण गृहों की स्थिति में सुधार व बच्चों का संरक्षण राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की प्राथमिकता : प्रियंक कानूनगो

 

भोपाल। देश के विभिन्न क्षेत्रों के बाल संरक्षण गृहों की स्थिति में सुधार करना और उनमें रह रहे बच्चों की सुरक्षा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की प्राथमिता है। यह बात राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने आज भोपाल में पत्रकारों से चर्चा में कही। उन्होंने बताया कि देश के सभी बाल संरक्षण गृहों की स्थितियों की लगातार मॉनिटरिंग की जायेगी। जिससे यहां रहने बाले बच्चों की स्थिति, सुरक्षा व वातावरण में अपेक्षित सुधार होंगे। उन्होंने कहा कि इन बाल संरक्षण गृहों की सुरक्षा व निगरानी के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ‘मासी’ नामक एप लॉन्च करने जा रहा है। श्री कानूनगो ने बताया कि जीपीएस इनेवल्ड इस एप से बाल संरक्षण ग्रहों में निरीक्षण के लिए पहुंचने वाले अधिकारियों की रियल टाइम जानकारी व उनके द्वारा दिया जा रहा डाटा भी रियल टाइम में मिल जायेगा। बच्चो के अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि देश में सभी बाल संरक्षण गृहों की मौजूदा स्थिति का आंकलन करवाने के बाद आयोग ने एक रिपोर्ट तैयार की है। जिसे राज्यों के साथ साझा किया गया है। ताकि आपेक्षित सुधार हो सकें। भोपाल में बालिकाओं के यौन शोषण से जुड़े एक मामले का जिक्र करते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने पीडि़त बालिकाओं से संरक्षण गृह में मुलाकात की है। आयोग इन बालिकाओं की सुरक्षा, व्यवस्था और देखभाल के साथ उन्हें मानसिक संत्रास की स्थिति से उबरने में हर संभव सहयोग देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बालिकाओं के यौन शोषण के आरोपियों को न्यायसंगत दंड दिलाने के लिए आयोग प्रतिबद्ध है। श्री कानूनगो ने बताया कि बाल अधिकार संरक्षण आयोग देश के धार्मिक स्थलों पर बच्चों द्वारा भीख मांगने और बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए परिवार आधारित देखभाल व्यबस्था के लिए गाइड लाइन जारी करने जा रहा है। प्रथम चरण में इसके लिए देश के 50 पर्यटन स्थल चुने गए हैं, जिनमें मप्र के 6 स्थान सांची, खजुराहो, उज्जैन, ओरछा, ओंकारेश्वर व पीताम्बरा पीठ का चयन किया गया है।  

आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि भोपाल स्थित एक संस्था द्वारा कथित तौर पर कुछ संगठनों के माध्यम से बच्चों के शोषण के बारे में भ्रामक जानकारियां फैलाने व उसकी शिकायत बाल अधिकार संरक्षण आयोग में करने का मामला सामने आया है। आयोग ने राज्य सरकार के माध्यम से इस संस्था से शिकायत संबंधी डाटा मांगा था कि कहां पर इस प्रकार इस प्रकार के मामले आए हैं। लेकिन उक्त संस्था राज्य सरकार को कोई डाटा उपलब्ध नहीं करा सकी है। आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि संस्थान के खिलाफ अपराधिक प्रकरण की दृष्टि से जांच की जाए।
एक अन्य मामले में आयोग ने सागर कलेक्टर द्वारा की गई कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए निर्देश दिए हैं कि सागर कलेक्टर धर्मांतरण का मामला दर्ज करने के साथ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की समुचित धाराओं के तहत कार्यवाही करें। 

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