बंधक भूखण्ड की करा दी रजिस्ट्री, सोसायटी ने करोड़ों डकारे


एफआईआर दर्ज होने के तेरह महीने बाद भी न्याय के लिए भटक रहे पीड़ित

विशेष संवाददाता, भोपाल।

राजधानी भोपाल में विगत डेढ़ दशक से जमीनों के फर्जीवाड़े के सैकड़ों मामले आये दिन सामने आते रहते हैं। इन मामलों में शायद ही किसी को न्याय मिल पा रहा हो। जमीन के फेर में जीवन भर की गाढ़ी कमाई ऐसे लोगों के हाथ में लुट रही है जो समाज की आंखों में धूल झोंकने का कार्य बखूबी कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला राजधानी की स्वजन गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित भोपाल का सामने आया है। इस संस्था के तत्कालीन अध्यक्षों एवं सचिव ने करोड़ों कमाने के फेर में जमकर फर्जीवाड़े किये। सोसायटी के 734 भूखण्ड को पहले आवास संघ में गिरवी रख कर सवा करोड़ का ऋण लिया। फिर आवास संघ से लिये गए ऋण को चुकाने की जगह बंधक रखे भूखण्डों को ही बेच दिया। मामले में बड़ी बात यह है कि 24 दिसम्बर 2019 को इस मामले में राजधानी के मिसरोद थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आज दिनांक तक दोषियों की न तो गिरफ्तारी की गई और न उनके खिलाफ कोई दण्डात्मक कार्रवाई की गई। इतना ही नहीं सीएम हेल्फलाइन के जरिये जन समस्याओं के निराकरण का दम्भ भरने वाली प्रदेश की शिवराज सरकार भी इस फर्जीवाड़े के आगे गुठने टेकते नजर आ रही है। सरकार कितना भी दावा करे पर सच्चाई यह है कि सीएम हेल्फलाइन में भी शिकायतों का निराकरण कराने की जगह उन्हें बंद कर दिया जाता है। इस मामले में भी यही हुआ। शिकायत को वैधानिक प्रकृति का बताते हुए पीड़ितों को सक्षम न्यायालय में वाद दायर करने की सलाह दे कर अपना पल्ला झाड़ लिया। हालांकि स्वजन गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित के फर्जीवाड़े का शिकार हुए पीड़ित अभी भी न्याय की दरकार में इधर उधर भटक रहे हैं। 

इस तरह किया करोड़ों का घोटाला 

ज्ञानचंद्र पाण्डेय सहकारी निरीक्षक एवं मोनू गुजरिया उप अंकेक्षक द्वारा पूर्व में की गई जांच अनुसार स्वजन गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित भोपाल द्वारा मप्र राज्य सहकारी आवास संघ में संस्था के 734 भूखण्ड बंधक रखे जाकर 17 अगस्त 1999 से 26 जनवरी 2000 के बीच 1 करोड़ 19 लाख 53 हजार का ऋण लिया। ऋण की अदायगी नहीं करने से मय ब्याज उक्त राशि 20 करोड़ 81 लाख 56 हजार 539 रुपये अभी भी बकाया है। इतना ही नहीं जब इस कर्ज से पेट नहीं भरा तो संस्था के तत्कालीन अध्यक्षों द्वारा बंधक भूखण्डों को भी विक्रय कर दिया गया है। इसके अलावा वर्ष 2011-12 के बाद से संस्था का ऑडिट भी नहीं कराया गया है और न ही कोई रिकार्ड उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा अनेक सदस्यों को अभी तक भूखण्डों का पंजीयन भी नहीं कराया गया है। इस कारण अनेक रजिस्ट्रियों के विरूद्व अनेक न्यायालयों में वाद दायर किये गये हैं। स्वजन गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. भोपाल के कर्ताधर्ताओं ने मनमानी की सारी हदें पार कर जमकर कर भ्रष्टाचार किया। 
करोड़ों कमाने के चक्कर में पूर्व में विकास कार्य किये बिना ही वरीयता क्रम का उल्लंघन करते हुये विभिन्न साईज के भूखण्ड विक्रय किये गये हैं। 

मिसरोद थाने में दर्ज हुई थी एफआईआर 

भू-माॅफियाओं के विरूद्व अभियान के दौरान स्वजन गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. भोपाल में भूखण्ड नहीं मिलने संबंधी शिकायतों के आधार पर पीएल चिल्ले वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक एवं मनोज कुमार श्रीवास्तव सहकारी निरीक्षक के द्वारा जांच कर, जांच प्रतिवेदन 23 नवम्बर 2019 को प्रस्तुत किया गया है। जिसके आधार उप आयुक्त सहकारिता जिला भोपाल के पत्र क्रमांक/3121 दिनांक 23.12.2019 के निर्देश के पालन में पीएल चिल्ले वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक के द्वारा संस्था के तत्कालीन अध्यक्षों एवं प्रबंधक के विरूद्व एफआईआर क्रमांक-735 दिनांक 24.12.2019 थाना मिसरोद भोपाल में दर्ज कराई गई थी। 

शिकायत बंद कर यह बताया कारण 

स्वजन गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. भोपाल के तत्कालीन अध्यक्षों द्वारा आवास संघ में बंधक रखे गए 734 भूखण्डों को चोरी-छिपे बेचने जैसे गंभीर अपराध के बाद भी शिकायत को आगे बढ़ाने की जगह सीएम हेल्फलाइन के कारिन्दों ने शिकायत को बंद करना ही बेहतर समझा। सीएम हेल्फलाइन के कारिन्दों ने शिकायत को बंद करने का भी अजीबो गरीब कारण बताया। सीएम हेल्फलाइन में बताया गया कि उपरोक्त गंभीर अपराध एवं भूखण्डों के अवैधानिक विक्रय को देखते हुये शिकायत का निराकरण प्रशासकीय जांच से किया जाना संभव नहीं हैं। आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थायें म.प्र. भोपाल के परिपत्र क्रमांक/गृ.नि./2020/330/भोपाल दिनांक 18.02.2020 के अनुसार जो शिकायत वैधानिक आधार पर निराकरण योग्य है एवं प्रशासकीय निराकरण करने पर इस न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है, तो ऐसे विवादों का निराकरण वैधानिक शक्ति का प्रयोग कर युक्तियुक्त आदेश से किया जा सकता है। इस प्रकरण का निराकरण वैधानिक प्रकृति का है इसलिये आवेदक से आपेक्षा की जाती है कि सक्षम न्यायालय में वाद दायर कर अनुतोष प्राप्त कर सकता है। शिकायतकर्ता मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 64 के अंतर्गत न्यायालय में वाद दायर कर अनुतोष प्राप्त कर सकता है।

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