कोरोनाकाल में 12वीं के छात्रों को बड़ी राहत, परीक्षा रद्द

 


नहीं होगी सीबीएसई की परीक्षा, सरकार ने अहम बैठक के बाद लिया फैसला

नई दिल्ली। कोरोनाकॉल में छात्रों को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने 10वीं के बाद अब 12 वीं की परीक्षा को भी रद्द कर दिया है। 18 प्लस के ऊपर छात्रों को वैक्सीनेशन ना हो पाने के कारण उनके हित में सरकार ने यह फैसला लिया है। नई दिल्ली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा सीबीएसई के चेयरमैन, शिक्षा मंत्रालय के सेक्रेटरी के अलावा कई केंद्रीय मंत्री शामिल हुए। इस अहम बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी छात्रों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता में है। ऐसे माहौल में उन्हें परीक्षा का तनाव देना ठीक नहीं है। हम उनकी जान खतरे में नहीं डाल सकते। उन्होंने कहा कि 12वीं का रिजल्ट तय समय सीमा के भीतर और तार्किक आधार पर तैयार किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों के हित को ध्यान में रखकर ही 12वीं की परीक्षा पर फैसला लिया गया है। छात्रों की सुरक्षा और सेहत हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है।परीक्षा को लेकर छात्र, पैरेंट्स और टीचर्स सभी परेशान थे। इस फिक्र को खत्म किया जाना जरूरी था।ऐसे दबाव भरे माहौल में छात्रों को परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जाना ठीक नहीं होगा।परीक्षा से जुड़े सभी पक्षों को इस समय छात्रों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की जरूरत है।

बैठक में रखे गए थे परीक्षा के सभी विकल्प

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री के सामने सभी विकल्प रखे गए। इस बैठक में सीबीएसई के चेयरमैन, शिक्षा मंत्रालय के सेक्रेटरी के अलावा केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, राजनाथ सिंह और प्रकाश जावड़ेकर शामिल हुए। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई। सू्त्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री के सामने परीक्षा कराने के सभी विकल्प रखे गए। ये विकल्प राज्य सरकारों और सीबीएसई बोर्ड के साथ लंबी चर्चा के बाद तैयार किए गए थे।

केजरीवाल ने परीक्षा रद्द करने की मांग की थी 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 12वीं की परीक्षाएं रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि पिछली परफॉर्मेंस के आधार पर छात्रों का आकलन किया जाए। केजरीवाल ने कहा था कि पेरेंट्स परेशान हैं। वे नहीं चाहते हैं कि वैक्सीनेशन किए बिना परीक्षा हो। एग्जाम रद्द होने के बाद उन्होंने इसे छात्रों के हित में लिया गया फैसला बताया है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से 2 दिन का वक्त मांगा था :

सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की परीक्षा पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। इसमें केंद्र ने कहा था कि वह गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना प्लान पेश करेगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आप जो भी निर्णय लेंगे, उसके पीछे आपको मजबूत दलील देनी होगी। जस्टिस खानविलकर ने कहा था कि छात्रों को बहुत उम्मीद थी कि इस साल भी पिछले साल की तरह परीक्षा नहीं होगी और नंबरिंग के लिए मेथड सिस्टम अपनाया जाएगा।

शिक्षा मंत्रालय ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया था 

सूत्रों से मिली जानकारी में बताया  गया था कि परीक्षाएं कराने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया था। इसे प्रधानमंत्री को भी दिखाया गया।

पहला प्रस्ताव : 12वीं के मुख्य विषयों की परीक्षा ली जाए। साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स के केवल 3 मुख्य विषयों की ही परीक्षा लेने के बाद बाकी सब्जेक्ट्स में मुख्य विषयों पर मिले नंबर्स के आधार पर मार्किंग का फॉर्मूला बनाया जाए।

दूसरा प्रस्ताव: 30 मिनट की परीक्षाएं हो और इनमें ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाएं। इस परीक्षा में विषयों की संख्या भी सीमित करने की बात कही गई, पर इसके बारे में साफ कुछ नहीं बताया गया।

तीसरा प्रस्ताव: अगर देश में कोरोना संक्रमण की स्थिति ठीक नहीं होती है तो 9वीं, 10वीं और 11वीं तीनों का इंटरनल असेसमेंट किया जाए। इसके बाद इसके आधार पर ही 12वीं का रिजल्ट जारी कर दिया जाए। इस प्रस्ताव को लेकर भी फॉर्मूला साफ नहीं हो पाया था।

12 राज्य चाहते थे कि परीक्षा का समय घटे

देशभर में 12वीं की परीक्षा को लेकर राज्यों ने अपने सुझाव केंद्र सरकार को भेजे थे। महाराष्ट्र, झारखंड, केरल, मेघालय, अरुणाचल, तमिलनाडु और राजस्थान ने परीक्षा से पहले टीके का सुझाव दिया था। महाराष्ट्र ने ऑनलाइन परीक्षा की भी बात कही थी। यूपी, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, असम, हिमाचल, चंडीगढ़, सिक्किम, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार और ओडिशा चाहते थे कि सिर्फ मुख्य विषयों की परीक्षा हो और परीक्षा का समय कम कर दिया जाए। परीक्षा बच्चों के अपने स्कूल में ही हों।

छात्रों ने लिखी थी चीफ जस्टिस को चिट्ठी 

जानकारी के अनुसार 3 हजार छात्रों ने परीक्षाओं को लेकर करीब एक हफ्ते पहले चीफ जस्टिस एनवी रमना को चिट्ठी लिखी थी। कहा था, 'कोरोना के बीच फिजिकल एग्जाम कराने का सीबीएसई का फैसला रद्द कर दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट असेसमेंट का वैकल्पिक तरीका तय करने का निर्देश दे। देश में कोविड-19 के चलते कई स्टूडेंट्स ने अपने परिवार वालों को खोया है। ऐसे में इस समय फिजिकली परीक्षा कराना न सिर्फ लाखों छात्रों और टीचर्स की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि उनके परिवार वालों के लिए भी यह परेशानी का सबब है।

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