सियासतदारों को 'बेचैन' करती शिवराज की 'खामोशी'

 

संदीप सिंह गहरवार

 भोपाल। मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव परिणाम को आये हुए एक हफता से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी 'सूबे का मुखिया' तय होने के दरमियान मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के कदम ताल और सन्नाटों को घेरती उनकी लम्बी खामोशी सूबे के सियासतदारों के बीच एक बड़ी हलचल पैदा कर रही है। दरअसल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से प्रारंभ हुई शिवराज की सियासी यात्रा, युवा मोर्चा तथा भाजपा संगठन से होते हुए मुख्यमंत्री बनने तक के सफर में जिस आक्रामकता और लीडरशिप के साथ उन्होंने साढ़े अठाहरह साल बतौर सूबे के मुखिया इस मप्र को चला कर दिए हैं, उन लम्हों में कभी भी इस तरह की खामोशी या बेफीक्री नजर नहीं आई। बतौर सूबे के मुखिया इन सालों में कभी पार्टी नेताओं या विपक्ष के आरोपों ने भी तत्समय उनको कभी इस तरह खामोश नहीं किया। सूबे के राजनीतिक समीक्षक भले ही उनकी खामोशी पर तरह-तरह के मायने तलाश रहे हो लेकिन यह खामोशी बता रही है कि सियासी स्थिति सुनामी की तरह दिखाई दे रही है।  उधर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनाव परिणामों से इतर तमाम अटकलों और उलझनों से दूर एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह प्रतिदिन के कार्यों में लिप्तता यह दर्शाती है कि वर्तमान में मुखिया को लकर हो रही सियासी उठापटक से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर हाथ जोड़े हुए सभी को राम-राम कहने की तस्वीर भले ही सियासत में बहुत सारे मायनों को जन्म दे रही हो पर एक सधे हुए परिपक्क और मझे हुए राजनीतिज्ञ के रूप में शिवराज की तरफ से एक गहरा संदेश दे रही है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर राम-राम के मायने कासे कई प्रकार से समझा जा सकता है। राम-राम अभिवादन और विदाई दोनों मौके पर प्रयोग किया जाता है। यानी जब कोई किसी के घर जाता है तब राम-राम कहता है और घर से विदाई लेता है तब भी राम-राम ही कहता है। ऐसे में इस तस्वीर को लेकर लोग अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। किसी का कहना है कि मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को ही सीएम बनाया जाएगा, इसलिए वो सभी को राम-राम कह रहे हैं। वहीं एक वर्ग का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज को अब इस पद से हटाया जाएगा, इसलिए वो राम-राम कह रहे हैं। बहरहाल जो भी हो आज तस्वीर से पर्दा उठ ही जायेगा। 

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