सभी जिलों में साइबर तहसील की लांचिंग टली



केंद्रीय मंत्री अमित शाह के दौरे के चलते नहीं हो सकी प्रारंभ 

भोपाल। मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में 1 जनवरी से शुरू होने वाली साइबर तहसील की लांचिंग टल गई है। यह लांचिंग केंद्रीय गृह मंत्री का दौरा फाइनल होने के बाद होगी। इस बीच साइबर तहसील की टेस्टिंग का काम सभी जिलों में चलता रहेगा। शाह इसी माह मध्यप्रदेश आएंगे जिसके बाद सभी जिलों में साइबर तहसील का काम शुरू होगा। इस बीच खरगोन में इस व्यवस्था की लांचिंग के लिए पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि हमारी सरकार गुना जैसी घटना और इसके लिए जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।

 साइबर तहसील के फायदे

 साइबर तहसील व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के किसी भी जिले में एग्रीकल्चर भूमि की बगैर बंटान वाली रजिस्ट्री होते ही 15 दिन में नामांतरण स्वत: हो जाएगा। साइबर तहसील की व्यवस्था सभी जिलों में लागू होने के बाद राजधानी के प्रमुख राजस्व आयुक्त कार्यालय में स्थापित साइबर तहसील में 15 तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों की आवश्यकता होगी। वर्तमान में 7 तहसीलदारों को संलग्न कर साइबर तहसील की व्यवस्था 12 जिलों में लागू है। पूरे प्रदेश में अतिरिक्त रूप से तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों को अटैच कर ये व्यवस्था तत्काल लागू की जा रही है। जल्दी ही तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों के सेट-अप पुनरीक्षित करने के लिए प्रस्ताव लाया जायेगा। साइबर तहसील में 15 तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों के पदों के सृजन का प्रस्ताव भी शामिल होगा। 

इन जिलों में काम कर रही साइबर

तहसील साइबर तहसील की व्यवस्था के लिए राजस्व विभाग द्वारा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 में संशोधन कर धारा 13-क में साइबर तहसील स्थापना के प्रावधान किए गए हैं। साइबर तहसील परियोजना अभी 12 जिलों सीहोर, दतिया, इंदौर, सागर, डिंडौरी, हरदा, ग्वालियर, आगर-मालवा, श्योपुर, बैतूल, विदिशा एवं उमरिया में चल रही है। 4 साफ्टवेयर इंटीग्रेड कर बनाई साइबर तहसील व्यवस्था साइबर तहसील में पंजीयन से नामांतरण तक की प्रकिया लागू है। साइबर तहसील को 4 अलग-अलग प्लेटफार्म जैसे संपदा पोर्टल, भूलेख पोर्टल, स्मार्ट एप्लीकेशन फार रेवेन्यू एप्लीकेशन पोर्टल और रेवेन्यू केस मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल से जोड़ दिया है। 

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